वाराणसी। कार्तिक मास की अमावस्या को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन करने का विधान है। कहा जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी का पूजन स्थिर लग्न में करना चाहिए। गणेश जी के दाहिने भाग में माता महालक्ष्मी को स्थापित करना चाहिये। मोक्ष की प्राप्ति के लिए वामावर्त सूंड़ वाली,लौकिक भौतिक सुख की कामना हेतु दक्षिणावर्त सूंड़ वाली भगवान गणेश की प्रतिमा घर मे स्थापित करना चाहिये। भगवती महालक्ष्मी के यथोपलब्धोपचार पूजन के बाद महालक्ष्मी के अंग-रूप, श्रीदेहलीविनायक,मसिपत्र,लेखनी,सरस्वती ,कुबेर तुुला-मान तथा दीपकों की पूजा की जाती है।

स्थिर लग्न में पूजन से लक्ष्मी का घर में वास

बीएचयू ज्योतिष विभाग के शोध छात्र ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र के मुताबिक इस वर्ष संवत 2075 शाके 1940 कार्तिक कृष्ण अमावस्या तिथि बुधवार 7 नवम्बर को दिवाली मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि मंगलवार को ही रात में 10 बजकर 07 मिनट से लग रही है जो 7 नवम्बर 2018 दिन बुधवार को रात में 09 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। इस प्रकार उदया तिथि में अमावस्या का मान सूर्योदय से ही मिल रहा है। साथ ही प्रदोष काल का भी बहुत ही उत्तम योग मिल रहा है। दीपावली के दिन श्री महागणपति, महालक्ष्मी एवं महाकाली की पौराणिक और तांत्रिक विधि से साधना-उपासना का विधान है। दिवाली के दिन उद्योग-धंधों के साथ-साथ नवीन कार्य करने एवं पुराने व्यापार में खाता पूजन का विशेष विधान है।

पूजन में प्रदोष काल अति महत्त्व पूर्ण

धर्मशास्त्रोक्त दीपावली प्रदोष काल एवं महानिशीथ काल व्यापिनी अमावस्या में है, जिसमें प्रदोष काल का महत्त्व गृहस्थों एवं व्यापारियों के लिए महत्त्वपूर्ण होता है और महानिशीथ काल का तान्त्रिकों के लिए उपयुक्त होता है। महानिशीथ काल में तान्त्रिक पूजन करने वालो के लिए इस दिन महानिशीथ काल लगभग रात 12:40 से 2 बजे तक व्याप्त रहेगा लेकिन अमावस्या व्यापिनी महानिशीथ काल का पूर्णत: अभाव है।

क्या है प्रदोष काल

दिन-रात के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहते है, जहां दिन विष्णु स्वरुप है वहीं रात माता लक्ष्मी स्वरुपा है, दोनों के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहा जाता है। इस प्रकार प्रदोष काल में दीपावली पूजन का श्रेष्ठ विधान है और प्रदोष काल में ही दीप प्रज्वलित करना उत्तम फल दायक होता है। प्रदोष काल शाम 5:19 से 7:53 बजे तक रहेगा। पूजन एवं खाता पूजन हेतु शुभ मुहूर्त्त स्थिर लग्न वृश्चिक दिन 7:16 बजे से लेकर 9:33 तक है। कुम्भ स्थिर लग्न दिन 1:26 से 2:57 तक तथा वृष स्थिर लग्न शाम 6:02 से 7:58 तक विद्यमान रहेगा। स्थिर लग्न में पूजा करना लाभप्रद होता है।

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