भदोही। गोपीगंज थाने में आटो ड्राइवर रामजी मिश्र की संदिग्ध हालात में मौत के मामले में सोमवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया जब हत्या का मुकदमा दर्ज होने पर पूर्व कोतवाल सुनील वर्मा ने सपरिवार धरने पर बैठने की घोषणा कर दी। कोतवाल तो नहीं पहुंचे लेकिन भाई और घर की महिलाओं संग दूसरे पुलिसवालों के परिवार से जुड़े ढाई दर्जन से अधिक लोग धरने पर बैठ गए। इसकी जानकारी मिलने पर पुलिस-प्रशासन में हडकंप मच गयी। भाई मोना वर्मा का आरोप है कि मेरे भाई को फंसाया गया। एनजीओ चलाने वाले दो लोगों की साजिश पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया वह भी बगैर जांच किए। हम लोग न्याय की मांग करते हैं। परिजनों ने इस दौरान डीआईजी से से बात किया और निष्पक्ष जांच का आश्वसन मिलने के बाद एसडीएम को ज्ञापन सौंप कर धरना समाप्त हो गया। किसी भी अनहोनी की आशंका से गोपीगंज कोतवाली को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। एडीएम और एसडीएम के संग मौके पर एएसपी डा. संजय कुमार समेत कई थानों की पुलिस थी।

सीधे हत्या की धाराएं लगना कहां का न्याय

परिजनों का आरोप था कि किसी संगठन के गौरव पांडे तथा राजीव शुक्ला ने फर्जी आरोप में मेरे भाई को फंसाया है। दूसरी तरफ आरोपी पूर्व कोतवाल सुनील वर्मा ने कहा कि यह पूरी तरह साजिश है। अगर मौत कथित पिटाई से हुई है तो गैर इरादन हत्या का मुकदमा दर्ज किया जा सकता था, मुझे सीधे आरोपी बनाना राजनीति है। आईपीसी की दूसरी धाराओं में भी मामले पंजीकृत किये जा सकते थे। संगठनों के पांच सूत्री मांगों में मेरे खिलाफ अंतिम मांग थी, लेकिन सबसे पहले मुझे ही बलि चढ़ाया गया। परिवार को 25 लाख मुवावजा की मांग, एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता अलावा दूसरी मांग की गयी थी। फिर दूसरी मांगे क्यों नहीं पूरी की गयी?

पोस्टमार्टम में नहीं है चोट के निशान

निलंबित इंस्पेक्टर ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि मुझे ही बलि का बकरा क्यों बनाया गया जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर के किसी भाग में आंतरिक चोट के निशान नहीं मिले। यह प्रमाणित नहीं हो पाया कि रामजी की मौत पिटाई या दूसरे कारणों से हुई फिर मेरे खिलाफ हत्या का मुकदमा क्यों दर्ज किया गया। मेरे साथ राजनीतिक साजिश रची गयी है। हम न्याय के लिए धरने पर बैठने का एलान किया। जहां तक मेरी जिम्मेदारी की बात है मैं आज भी उसी बात पर अटल हूं कि रामजी की मौत पिटाई से नहीं परिसर में दिल का दौरा पड़ने से हुई। जब यह सवाल पूछा गया कि क्या धरने पर बैठने के लिए एसपी भदोही से अनुमति ली गयी है जिस पर उन्होंने कहा सारा मामला संज्ञान में हैं वैसे हमने एएसपी को बता दिया था। यह सवाल उठा कि आप एक हत्या के आरोपी होते हुए प्रदर्शन कैसे कर सकते है,ं उन्होंने कहा मेरे साथ गलत हुआ हमें न्याय चाहिए। कुछ लोग अपनी दुकान चमकाने के लिए मेरे खिलाफ साजिश रची है। हलांकि वर्मा खुद प्रदर्शन स्थल पर नहीं पहुंचे थे। कहीं न कहीं से उन्हें यह आशंका है कि अगर धरने पर बैठते हैं तो गिरफ्तारी के साथ नौकरी से बर्खास्तगी भी हो सकती है।

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