वाराणसी। गंगा की लहरों पर उतरने से पहले ही अलकनंदा क्रूज को लेकर काशी में कोहराम मच गया है। नाविकों के एक बड़े वर्ग ने इस परियोजना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नाविकों ने साफ कह दिया है कि किसी भी स्थिति में क्रूज को गंगा में उतरने नहीं दिया जाएगा। नाविकों के मुताबिक क्रूज के चलने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। नाविक इसके पीछे परंपरा और पीढ़ियो से चल रहे रोजगार का हवाला दे रहे हैं।

सरकार को लग सकता है झटका

गंगा में क्रूज चलने की खबर इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई है। फेसबुक, ट्वीटर और व्हाट्सअप पर इस खबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धी के तौर पर दिखाई जा रही है। 15 अगस्त को अलकनंदा क्रूज के गंगा में उतरने की तारीख भी तय है। लेकिन इसके पहले नाविकों के विरोध ने योजना से जुड़े लोगों के माथे पर बल ला दिया है।

नाविकों ने दिया अल्टीमेटम

नाविकों ने रविवार को अस्सी घाट पर एक आपात बैठक की। नाविकों के मुताबिक हर पहलू पर चर्चा हुई है। तय हुआ है कि किसी भी कीमत पर क्रूज को नहीं चलने दिया जाएगा। नाविकों का कहना है कि आज एक क्रूज चल रहा है। कल और क्रूज आएंगे और हम दाने-दाने के लिए मोहताज हो जाएंगे। रामनगर से वरुणा घाट तक हम लोगों की अपनी परंपरागत तरीके से नाव चलती है। हर घाट पर अलग-अलग मालिक होते हैं। हर घाट का सिस्टम अलग-अलग है। रामनगर में अलग है तो अस्सी घाट पर अलग है। अन्य घाटों पर अलग सिस्टम है।

पहले भी नाविक कर चुके हैं विरोध

गंगापुत्र के नाम से मशहूर नाविकों को बीजेपी का समर्थक माना जाता है। पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी के प्रस्तावकों में एक नाविक भी शामिल था। यही कारण है कि हर बार जिला प्रशासन नाविकों की मांगों के आगे झुक जाता है। दरअसल इसके पहले गंगा में हल्के ई-वोट उतारने की तैयारी थी। गुजरात की एक कंपनी ने इसका टेंडर लिया था। लेकिन नाविकों के विरोध के आगे ई-वोट गंगा में नहीं उतर सके।

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