काशी के संतों ने पीएम को लिखा खत, अल्पसंख्यक छात्रों को स्कॉरलरशिप देने के फैसले पर उठाए सवाल

वाराणसी. मोदी सरकार के अल्पसंख्यक छात्रों को स्कॉलरशिप देने के फैसले के खिलाफ अब संत समाज ने मोर्चा खोल दिया है. इसकी आवाज उठी है पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से. यहां पर अखिल भारतीय संत समिति ने पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री को पत्र लिखकर हिंदू अल्पसंख्यक के मुद्दे को उठाया है. अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेंद्रानंद ने मांग की है कि जिन राज्यों में हिंदुओँ की संख्या कम है, उनको भी अल्पसंख्यक घोषित कर सुविधा प्रदान करें.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

जितेंद्रानंद के मुताबिक हिंदुस्तान में 8 ऐसे प्रदेश हैं जहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं. इसके पीछे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया है. उन्होंने कहा कि साल 2002 में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने केंद्र सरकार को ये आदेश दिया है कि राज्यवार अल्पसंख्यकों को चिन्हित किया जाए. ऐसे में जब तक ये तय ना हो पाए कि भारत में अल्पसंख्यक कौन है. इस तरह अल्पसंख्यकों को स्कॉलपरशिप देने का कोई महत्व नहीं है.

जितेंद्रानंद ने केंद्र सरकार से पूछी अल्पसंख्यक की परिभाषा

जितेंद्रानंद सरस्वती ने मौजूदा सरकार से अल्पसंख्यक शब्द की परिभाषा भी पूछी है. उनके मुताबिक भारतीय संविधान में एक जन, एक राष्ट्र की भावना की बात कही गई है. इसलिए अल्पसंख्यक शब्द की परिभाषा कहीं से संविधान में नहीं है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के नियमों और मानवाधिकार आयोग के मानकों को देखा जाए तो हिंदुस्तान में मुसलमान अल्पसंख्यक नहीं हो सकता है. हां वो दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय उसे जरूर कहा जा सकता है. आपको बता दें कि ईद के दिन मोदी सरकार ने अल्पसंख्यकों के 5 करोड़ बच्चों को अगले पांच सालों तक 700 करोड़ रुपए स्कॉलरशिप देने की बात कही है.

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