काशी कथा: विकास के नाम पर काशी के विरासत से छेडछाड चिंताजनक: डा. जितेंद्र नाथ मिश्र

वाराणसी। विकास के नाम पर काशी के तीर्थ स्थलों को पर्यटन केंद्र के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है। अपने में काशी की परंपरा, इतिहास, जीवंतता समेटी गलियों को कॉरिडोर का रूप दिया जा रहा है। यूं कहें कि काशी की सांस्कृृतिक परंपरा को नष्ट किया जा रहा है। ये बातें शुक्रवार को वरिष्ठ साहित्यकार डा. जितेंद्र नाथ मिश्र ने कही। डा. मिश्र आईआईटी बीएचयू के मालवीय उद्यमिता संवर्धन केंद्र में काशी कथा की ओर से आयोजित 14 दिवसीय काशी की सांस्कृृतिक समग्रता विषयक कार्यशाला के उदघाटन सत्र में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। उन्होंने काशी की वैशिष्टता के बारे में बताते हुए कहा कि काशी की संस्कृृति भारतीय संस्कृृति की परिचायक है।

काशी किसी एक की नहीं समग्रता की प्रतीक

डा. मिश्र मानते हैं कि यह भारत की धर्मधानी है। यह पंचोपासना का शहर है। यह किसी एक मत, सम्प्रदाय या विचारधारा से प्रभावित न होकर समग्रता का प्रतीक है। यहां की संस्कृृति में आपसी भाईचारा, प्रेम स्नेह है यहां उंच नीच का कोई स्थान नहीं रहा है। कहा कि आज सम्भ्यताओं के आक्रमण के कारण यहां की विशिष्ट संस्कृृति में धीरे-धीरे ह्रास हो रहा है। हमने अब संस्कृृति को कल्चर बना दिया है। जबकि कल्चर सभ्यता को पर्याय है। सभ्यता का संबंध बुद्धि से है वहीं संस्कृृति विवेक का परिणाम है। कहा कि हमें यदि अपनी यानि काशी की संस्कृृति को बचाना है तो बाहरी सभ्यताओं से सावधान रहने की जरूरत है। वहीं, इस अवसर पर प्रो राणा पीवी सिंह ने काशी के भौगोलिक, देवायतनों के स्थान के बारे में वैज्ञानिक व्याख्या की। साथ ही पंचक्रोशी या़त्रा, मंदिरों के अंकशास्त्र के आधार पर उनका महत्व बताया। कहा कि पंचक्रोशी, अंतर्ग्रही यात्रा, केदार यात्रा के धार्मिक महत्व के साथ ही वैज्ञानिक दृृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला।

विभिन्न खासियतों के चलते कई नाम

दूसरे सत्र में बोलते हुए क्षेत्रिय पुरातत्व अधिकारी डा. सुभाष यादव ने काशी के पुरातात्विक इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। काशी के विभिन्न नामों और उपनामों के बारे में पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर चर्चा की। कहा कि विभिन्न खासियतों के आधार पर इस शहर के कई नाम रहे हैं। कहा कि प्राचीन समय से ही ये शहर ज्ञान का केंद्र रहा है। चिंतन मनन और अध्ययन के लिए विद्वान यहां आते रहे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो एसएन उपाध्याय ने की जबकि संचालन प्रो. पीके मिश्रा और धन्यवाद डा. अवधेश दीक्षित ने किया। इस मौके पर योगेंद्र द्विवेदी, संजय शुक्ल, डा. संजीव सर्राफ, डा. विकास सिंह, अरविंद मिश्र, दीपक सिंह, दीपक , विकास गुप्ता, राकेश पटेल, गोपेश पांडेय, रिंकल दीक्षित सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

Related posts