बढ़ी संवेदन शीलता के बावजूद काशी की उपेक्षा! पिछली बार हाइकोर्ट के फैसले से पहले दिया गया था हेलीकाप्टर

वाराणसी। लगभग एक दशक पहले अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मामले को लेकर हाइकोर्ट का फैसला आना था। उस समय देश के प्रधानमंत्री यहां के सांसद नहीं थे लेकिन सूबे में सर्वाधिक संवेदनशील स्थान के रूप में इसे ही माना गया था। तत्कालीन बसपा सरकार की मुखिया मायावती ने फैसला आने से पहले ही वाराणसी को हेलीकाप्टर उपलब्ध करा दिया था। उस समय जोन के प्रभारी आईजी स्तर के अधिकारी राजेन्द्रपाल सिंह थे। सिर्फ काशी ही नहीं बल्कि प्रयाग से लेकर गोरखपुर तक के इलाका में हवाई गश्त के साथ समन्यवय स्थपित करने की जिम्मेदारी उनको सौंपी गयी थी। चार दिन तक बाबतपुर एयरपोर्ट से हेलीकाप्टर लगातार गश्त कर निगरानी रखता था। इस दफा जोन के प्रभारी एडीजी स्तर केतेज-तर्रार अधिकारी ब्रजभूषण हैं लेकिन हेलीकाप्टर तो दूर काशी में अतिरिक्त फोर्स तक देने का कोई आदेश अब तक नहीं हुआ है।

सर्वाधिक आतंकी हमले हुए यहीं पर

पूरे प्रदेश में जितनी आतंकी वारदात हुई होंगी उतनी अकेले काशी में हो चुकी है। जोन के आजमगढ़ का संजरपुर मॉडल लंबे समय तक देश की तमाम एजेंसियों के लिए चुनौती बना रहा। बटला हाउस कांड से लेकर देश के दूसरे हिस्सों में हुई आतंकी वारदातों में यहां के युवा आरोपित ही नहीं बल्कि एनआईए की इनामियों की सूची मेंलाखों का पुरस्कार के श्रेणी में हैं। केन्द्र सरकार के मुखिया पीएम यहां के एसपी हैं जिससे संवेदनशीलता बढ़ी है। राहत की बात यही है कि प्रदेश सरकार ने यहां पर तेज-तर्रार अधिकारियों की तैनाती कर रखी है जो अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।

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