जान्हवी तट पर काशी गंगा महोत्सव का हुआ आगाज, देव दीपावली तक राजघाट पर होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम

वाराणसी। काशी में गंगा महोत्सव को आरम्भ हुए 25 साल हो गये हैं। देश ही नहीं विदेशों तक इसकी ख्याति पहुंच चुकी है। पहले आरपी घाट पर इसका आयोजन होता था लेकिन कुछ साल पहले राजघाट पर इसे शिफ्ट कर दिया गया है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये काशी का गंगा महोत्सव उभरते एवं प्रतिष्ठित कलाकारों को मंच प्रदान करता है। शुक्रवार को 25वें काशी गंगा महोत्सव शुभारंभ करते हुए प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा. नीलकंठतिवारी ने कहा कि काशी के कण-कण में संगीत बसी है। यहां के गली एवं मोहल्लों से गुजरते हुए संगीत के धुन यूं ही कानो में गूंजते हैं। काशी विश्व की प्राचीनतम नगरी के साथ-साथ सांस्कृतिक राजधानी भी हैं। काशी गंगा महोत्सव विश्व में अपनी पहचान बना चुका है। स्थानीय उभरते एवं प्रतिष्ठित कलाकारों के साथ-साथ के कोने-कोने से कलाकार अपने कला का प्रदर्शन करने आते हैं।

पहले दिन इन्होंने की प्रस्तुति

काशी गंगा महोत्सव के पहले दिवस शुक्रवार को संगीत के पहले निशा में अंशुमान महाराज एवं समूह द्वारा थीम सॉन्ग, शुभम केसरी द्वारा कत्थक नृत्य, सुश्रीगीता महालिक द्वारा ओडिसी समूह नृत्य, पंडित विकास महाराज द्वारा सरोद वादन एवं निर्गुण भजन सम्राट भरत शर्मा व्यास द्वारा आकर्षक प्रस्तुति प्रस्तुत की गई। पर्यटन विभाग ने इस कार्यक्रम को लेकर काफी दिनों से तैयारियां की थी और देव दीपावली तकयह अनवरत जारी रहेगा। 

Related posts