वाराणसी। सिगरा में बुधवार की रात ठेकेदार विशाल सिंह की हत्या करने की खातिर माफिया गिरोह के शार्प शूटरों को सुपारी दी गयी थी। दोनों हाथ से जिस तरह फिल्मी ढंग से दोनों हाथ से फायरिंग की और दौड़ा कर मौत की नींद सुलाया उससे पुलिस का भी मानना है कि शूटर प्रोफेशनल थे। आरम्भिक जांच में पता चला है कि विशाल कुछ सालों के भीतर जिस तरह से तेजी से कारोबार में बढ़ते गये थे कई लोगों की आंख में खटक रहे थे। यहां तक कि जिन लोगों के संग पहले काम शुरू किया था उसने दूरियां बन चुकी थी। पिछले दिनों पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा किनारे बंदरगाह के निर्माण में विशाल को बोल्डर की सप्लाई का ठेका मिला था। इससे विरोधी और चिढ़ गये और हर हाल में हत्या की साजिश रची। सूत्रों की माने तो हत्या का सबब करोड़ों को लेन-देन है। विशाल का काफी पैसा कुछ लोगों के पास दबा है और वह भी चाहते थे कि वह रास्ते से हट जाये।
शौक के चलते ली बुलेट बनी मौत का सबब
बताया जाता है कि विशाल हमेशा स्कार्पियो से चलते थे। उन्होंने एक साथ तीन स्कार्पियो ली थी जिसमें से दो दूसरों को दी थी। पिछले दिनों एक करीबी ने उन्हें अपनी बुलेट इस कारण बेच दी क्योंकि वह किश्त नहीं जमा कर पा रहा था। बुलेट का इस्तेमाल वह होटल से घर से जाने के लिए करने के साथ शहर के भीतरी इलाकों में जाने के लिए करने लगे। माना जा रहा है कि कई दिनों से रेकी करने के बाद शूटरों को इसका पता चल गया और वहले से वह घात लगा कर बैठे थे।
बड़े राजनैतिकों से भी थी निकटता
परिवार से जुड़े लोगों ने स्वीकार किया कि ठेकेदारी के काम के चलते कई बड़े राजनैतिकों से भी संबंध थे। पहले इनमें से एक के करीबी ने ठेकेदारी का गुर सिखाया लेकिन विशाल उनसे काफी आगे निकलते गये। दशा यह हो गयी थी कि उन्हें अप काम करने के लिए विशाल के उपर निर्भर होना पड़ता। पिछले दिनों इसे लेकर पंचायत भी हुई थी। पंचायत में विशाल का पैसा देना तो कबूल किया गया लेकिन रिश्ते में खटास आ गयी। इससे अनभिज्ञ विशाल काम को बढ़ाने में जुटे रहे।
खतरे का आभास था ठेकेदार को!
विशाल न तो कोई नशा करते थे नही किसी दूसरी तरह के शौक थे। उन्हें सिर्फ अपने काम से सरोकार रहता था। पिछले कुछ दिनों से उन्हें आभास हो गया था कि अजनबी चेहरे आसपास मंडराते हैं। कुछ लोगों से उन्होंने इसका जिक्र किया था। बावजूद इसके यह अहसास नहीं था कि सीधे हत्या की साजिश रची जा चुकी है। सुरक्षा को लेकर बरती गयी लापरवाही ही मौत का सबब बन गयी।

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