वाराणसी। कचहरी और कलेक्ट्रेट परिसर 23 नवंबर 2007 को हुए ब्लास्ट को 11 साल से अधिक समय बीच चुका है लेकिन इस मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी तक नहीं हुी है। वकीलों को इसका खासा मलाल है और ब्लास्ट में कई लोग तो अब भी अपाहिज का जीवन बिता रहे हैं। इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) का मोस्ट वांटेड आतंकी आरिज उर्फ जुनैद की गिरफ्तारी के बाद अब इसके गुनहगारों को सजा दिलाने का रास्ता साफ हो रहा है। पिछले 12 सालो से फरार जुनैद पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। दिल्ली पुलिस ने इंडो-नेपाल बार्डर से मोस्ट वांटेड आतंकी जुनैद को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर 15 लाख रुपए का इनाम घोषित था। आरोपी बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद से ही फरार चल रहा था।

भटकल की गिरफ्तारी के बाद खुला था राज

मूल रूप से बिलरियागंज (आजमगढ़) के नसीरपुर गांव का निवासी आरिज उर्फ जुनैद दिल्ली, अहमदाबाद, यूपी और जयपुर में हुए धमाकों में शामिल रहा है। जुनैद की कचहरी ब्लास्ट में संलिप्तता खुद इंडियन मुजाहिदीन के संस्थापक यासीन भटकल ने गिरफ्तारी के बाद कबूल की थी। यही वजह है कि उसके पर एनआईए की तरफ से 10 लाख का इनाम था और दिल्ली पुलिस ने उस पर 5 लाख का इनाम घोषित कर रखा था। जुनैद के नेपाल से पाकिस्तानी पासपोर्ट पर कराची जाने की भी चर्चा लंबे समय तक रही थी। लश्कर समेत दूसरे संगठनों के लिए कुछ दिन तक उसने काम किया लेकिन इसके बाद उसका झुकाव आईएस की तरफ बढ़ने लगा था।

बटला हाउस कांड के दौरान हुआ था फरार

कचहरी ब्लास्ट के लगभग एक साल बाद 19 सितंबर 2008 को दिल्ली के जामिया नगर इलाके में स्थित बटला हाउस में इंडियन मुजाहिदीन के संदिग्ध आतंकवादियों के खिलाफ हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने दो संदिग्ध आतंकवादियों आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद को मार गिराया गया था। इस मुठभेड़ में एनकाउंटर विशेषज्ञ और दिल्ली पुलिस निरीक्षक मोहन चंद शर्मा शहीद हो गए थे। वहां से फरार होने वालों में जुनैद शामिल था।

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