जौनपुर। नक्सली हिंसा से प्रभावित सुकमा (छत्तीसगढ़) में गुरुवार को हुए नक्सली हमले में शहीद एसआई राजेश कुमार बिंद का शव पैतृक गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। परिजनों की चीख पुकार सुन वहां पर मौजूद लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाये। पत्नी उषा देवी शव देखते ही दहाड़े मारकर रोते हुए बेहोश होकर गिर पड़ी। हर तरफ मातम छाया रहा। शव को लेकर आये साथियों का कहना था कि कांकेर क्षेत्र में सुबह नक्सलियों के खिलाफ एक आॅपरेशन हुआ था। इसके लिये जवानों की टीम गई थी। वापस कैम्प पर आते समय बाइक से सभी जवान आ रहे थे लेकिन बीच रास्ते में ही कीचड़ में फंसने से शहीद राजेश नीचे उतरा। इसी बीच दुर्भाग्य से उसका पैर नीचे बिछाये गए माइंस पर पड़ गया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। जहां उपचार के दौरान वह देश के लिए शहीद हो गया।

आठ साल के मासूम ने दी मुखाग्नि

शव के साथ पहुंचे पुलिस डीआईजी इलाहाबाद आर डिंगडांग, डीएसपी वाराणसी धीरेन्द्र कुमार पाठक सहित 95 बटालियन के जवान एवं सीओ व एसडीएम मछलीशहर, जगदम्बा प्रसाद सिंह सहित अन्य अधिकारी परिजनों को सांत्वना दी। इसके बाद रेजीमेन्ट बटालियन द्वारा अंतिम सलामी देकर शव को लेकर वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार किया गया जहां पर मुखाग्नि आठ साल के मासूम अमन ने दी। यहां पर भारी संख्या में क्षेत्रवासी सहित पुलिस बल मौजूद रही। शहीद की पत्नी उषा के मुख से बार-बार यही निकल रहा था कि शिवरात्रि की छुट्टी में आने के बाद यह कहकर ड्यूटी पर गये कि बेटी मीनाक्षी के लिए इस बार गिफ्ट लाऊंगा लेकिन आया उनका पार्थिव शरीर।

परिजनों ने शासन-प्रशासन से रखी यह मांग

शहीद राजेश कुमार बिंद के परिजनों ने एसडीएम मछलीशहर को पत्रक देकर मांग किया कि शहीद के नाम पर गोधना निगोह मार्ग का नाम रखा जाय। शहीद की पत्नी उषा देवी के नाम से पेट्रोल पंप देने के साथ शहीद स्मारक बनाया जाय। इस सम्बन्ध में एसडीएम मछलीशहर ने बताया कि डीएम जौनपुर के नाम से पत्रक शहीद के परिजनों द्वारा दिया गया है। जिसे शासन स्तर पर भेजा जाएगा। शहीद के अंतिम विदाई में भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील उपाध्याय, सांसद प्रतिनिधि राजेश सिंह, मण्डल अध्यक्ष मीरगंज कृष्ण कांत दूबे, मछलीशहर विधायक जगदीश सोनकर, पूर्व सपा सांसद तूफानी सरोज, प्रदीप कुमार दूबे सहित कई नेता शामिल होकर सलामी देते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

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