वाराणसी। सिकरौरा नरसंहार कांड में एक बार फिर से नया पेंच फंस गया है। आरोपित एमएलसी बृजेश सिंह को कड़ी सुरक्षा में सेंट्रल जेल से लाकर शनिवार को अपर जिला जज (प्रथम) एके सिंह की अदालत में पेश किया गया। दूसरी तरफ इस मामले की वादिनी हिरावती देवी गवाही देने के आज भी अदालत में उपस्थित नहीं हुई। उभय पक्षों के मुताबिक न्यायधीश ने पत्रावली के अवलोकन के बाद विचारण पर विचार करने को कहा है। गौरतलब है कि इससे पहले जब एडीजे के तौर पर न्यायधीश एके सिंह सुनवाई कर रहे थे तब वादिनी की तरफ से ट्रांसफर अप्लीकेशन दी गयी थी। अब तक सुनवाई पीके शर्मा की कोर्ट में चल रही थी और उनके स्थानांतरण के बाद एके सिंह एक बार फिर से एडीजे प्रथम हुए हैं। माना जा रहा है कि इस तथ्य को ध्यान में रखते न्यायधीश ने पहले पत्रावली के अवलोकन का वास्ता दिया है। अगली सुनवाई के लिए 8 नवंबर की तिथि नियत की गयी है।
कानूनी दांव-पेंच में अटकी है गवाही
बता दें कि 9 अप्रैल 1986 को चंदौली जनपद के सिकरौरा गांव (बलुआ) में प्रधान समेत 7 लोगों की हत्या कर दी गयी थी। इस मामले में मृतक की पत्नी हिरावती देवी की तहरीर पर बृजेश सिंह समेत कई लोगो को आरोपी बनाया गया था। बृजेश की इस मामले में ्िगरफ्तारी हुई थी लेकिन जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गये थे। भुवनेश्वर (उड़ीसा) में नाटकीय ढंग से गिरफ्तारी के बावजूद मामले का विचारण नहीं शुरू हुआ तो हीरावती ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर सुनवाई शुरू हुई तो घटना के समय बृजेश के बालिग होने को लेकर काफी समय तक खींच-तान चली।

admin

No Comments

Leave a Comment