गम्भीर संकट से गुजर रही है पत्रकारिता, अखबार पढ़ना छोड़ते जा रहे हैं लोग

वाराणसी। पत्रकारिता अब एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। यूं कहें आजादी पूर्व की चुनौतियों से भी अधिक। फर्क बस इतना है कि आजादी के पूर्व हमें गैरों से जूझना पड़ता था और आज अपनों ने ही संकट उत्पन्न कर रखा है। अब के दौर में जो संकट है उनके समाधान के लिए हम एकजुट नहीं हुए तो स्थितियां बेहद ही खतरनाक होने का संकेत दे रही हैं। हिन्दी पत्रकारिता के आधार स्तम्भ सम्पादकाचार्य बाबूराव विष्णुराव पराड़कर जी की जयन्ती के अवसर पर पराड़कर स्मृति भवन में आयोजित बदलते दौर में पत्रकारिता की चुनौतियां विषयक संगोष्ठी में वक्ताओं ने उक्त विचार व्यक्त किये। वक्ताओं ने कहा कि आज पत्रकारिता इस दौर में पहुंच चुकी है कि समाचार पत्रों की विश्वश्वनीयता पर प्रश्न उठने लगे हैं। हालात यह है कि काफी संख्या में लोगों ने समाचारपत्र पढ़ना ही छोड़ दिया है। ऐसी स्थिति इसलिए उत्पन्न हुयी है क्योंकि अखबारों ने जनसरोकारों से दूरी बना ली है। वह समाचार भी प्रकाशित हो रहे है जिनसे समाज पर बुरा असर पड़ रहा है। आज सही और गलत का कोई मतलब समाचारपत्रों में नहीं रह गया है।

बदलती जा रही है ‘नायक’ की परिभाषा

वक्ताओं ने कहा कि पराड़कर के दौर से भी अधिक चुनौतियां हैं। उस समय लक्ष्य सिर्फ आजादी थी। उस दौर में नायक (हीरो) वह होता था जो सत्ता से टकराता था। लेकिन आज की स्थितियां इतनी बदतर हो चुकी है कि अब लोग उसे हीरो समझते है जो सत्ता के करीब होता है। वक्ताओं ने पत्रकारिता के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुये कहा कि पहले दक्ष लोग ही पत्रकारिता में आते थे लेकिन आज न्यू मीडिया ने एक विध्वंश पैदा कर दिया है। अब यह दो धारी तलवार की तरह हो चली है। समाचारों में आज वह चीजें नहीं परोसी जा रही है जिससे समाज बनता है। एक दौर था जब भाषा, वर्तनी पर खास ध्यान दिया जाता था। लेकिन आज बदलते दौर की पत्रकारिता ने हिन्दी की टांग ही तोड़ कर रख दी है।

इनकी रही मौजूदगी

संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार विश्वास चन्द्र श्रीवास्तव ने की व संचालन संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप कुमार ने किया। अतिथियों का स्वागत संघ के अध्यक्ष राजनाथ तिवारी ने व धन्यवाद ज्ञापन महामंत्री मनोज श्रीवास्तव ने किया। गोष्ठी में पूर्व अध्यक्ष केडीएन राय, सुभाषचन्द्र सिंह, पूर्व महामंत्री राजेन्द्र रंगप्पा, डा. अत्रि भारद्वाज, आर. संजय, राजेन्द्र यादव के अलावा वरिष्ठ साहित्यकार जितेन्द्रनाथ मिश्र, समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के मंत्री अजय मुखर्जी, सामाजिक कार्यकर्ता अनूप श्रमिक व जागृति राही अब्दुल्ला खां ने भी विचार व्यक्त किये। गोष्ठी में सुधीर गणोरकर, देवकुमार केसरी, राममिलन लाल श्रीवास्तव, उजैर खान, मोहम्मद इस्माइल खां उपस्थित थे।

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