वाराणसी। प्रदेश की भाजपा सरकार ने सहारनपुर में जातीय हिंसा के आरोपित चंद्रशेखर रावण को रातो-रात छोड़ने का जो निर्णय लिया वह गले की फांस बनता नजर आ रहा है। रावण ने छूटने के साथ एक तरफ जहां बसपा सुप्रीमो मायावती की तारीफ में कसीदे कढ़े वहीं दूसरी तरफ भाजपा को जमकर कोसा। खास यह कि दो माह पहले काशी आये गुजरात के दलित नेता और विधायक जिग्नेश मेवाती ने मीडिया के साथ बातचीत में यही बात कही थी। जिग्नेश का कहना था कि बहन मायावती को पीएम बनाना है और दाहिनी तरफ रावण खड़ा होगा तो बांयी तरफ जिग्नेश। सूत्रों की माने तो खुफिया विभाग ने यह जानकारी ‘उपर’ तक भेजी ही नहीं थी जिससे रावण की रिहाई के समय इस पहलू पर भी ध्यान दिया जाता। बहरहाल अब खुफिया विभाग हाथ मल रहा है क्योंकि जो बाते जिग्नेश ने दो माह पहले कही थी वह सही साबित हो रही है।

रावण ने बदल लिया ‘स्टंैड’

बताया जाता है कि रावण को बसपा का कट्टर विरोधी माना जाता था और उसके आंदोलन का प्रभाव जिन इलाकों में था वहां पार्टी कमजोर हुई थी। दूसरी तरफ भाजपा को इससे लोकसभा से लेकर विधानसभा चुनाव मे ंफायदा हुआ था। सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद हुए जातीय दंगों में रावण का नाम आने के बाद आईपीसी की धाराओं के तहत गिरफ्तारी ही नहीं की गयी बल्कि रासुका तक लगी। सूत्रों का कहना है कि जेल के भीतर जो कुछ भी संदेश मिले हो लेकिन रावण ने बाहर निकलन के साथ मायावती को जहां बुआ कहते हुए पूरा सम्मान दिया वहीं भाजपा को जमकर कोसा।

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