वाराणसी। अत्यधिक सुरक्षित इलाका माने जाने वाले छावनी क्षेत्र स्थित जेएचवी मॉल में फायरिंग न हुई होती तो इस मामले को भी उसी तरह दबा दिया जाता जैसे आरोपितों के पुराने ‘पाप’ गायब हुए थे। पहले हुई घटनाओं में प्रभावी पैरवी के चलते पुलिस के रोजनामचे पर वारदात दर्ज ही नहीं होती थी। इस मामले में फरार चल रहे 50 हजारा इनामी आरा (बिहार) निवासी ऋषभ सिंह उर्फ रिशू और कुन्दन सिंह ने काशी विद्यापीठ से एक-दो नहीं बल्कि सौ से अधिक अवैध पिस्टल बेची हैं। अवैध असलहें तो इनके लिए खिलौना सरीखी थी। दोनों के सिर पर एक प्रभावशाली नेता पुत्र का हाथ है। पहले बहन के सहारे छात्र राजनीति में स्थान बनाने वाले के संरक्षण में थे लेकिन सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद पाला बदल लिया। यह चौंकाने वाला खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि इस कांड के सूत्राधार कहे जाने वाले आलोक उपाध्याय ने किया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आलोक का यह भी कहना था कि वारदात के बाद भी नेतापुत्र से सम्पर्क हुआ था और उन्ही के निर्देश पर इन दोनों ने कोलकाता की राह पकड़ी।

सोशल मीडिया पर तंज कसता था शशांक

आलोक ने यह भी बताया कि जेएचवी मॉल में शोरूम में जिस शशांक को ढूंढते हुए हम लोग पहुंचे थे उसने सोशल मीडिया फेसबुक पर एक बार बार नहीं बल्कि हर बार चुभने वाले कमेंट किये थे। पिछले दिनों हुए छात्रसंघ चुनाव के बाद तो सारी हदें पार कर दी थी। प्रेमिका की बहन को नौकरी से निकवाना वह उपलब्धि के तौर पर बताने लगा थे। आलोक ने अपने साथियों को यह सब बताया तो वह भी सबक सिखाने के लिए तैयार हो गये। रोहित के माध्यम से बगैर चेकिंग के घुसना तय हुआ था।

भेजा गया जेल

गिरफ्तार 50 हजारा इनामी आलोक उपाध्याय निवासी फुलवरिया बलुआं (चन्दौली) को एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने मंगलवार को मीडिया के सामने पेश किया। बाद में संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी के बाद 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल भेज दिया गया।

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