जेल के खेल पर कोर्ट सख्त, स्वस्थ दुष्कर्म आरोपित को मानसिक रोगी बताने पर डीआईजी को जांच का आदेश

वाराणसी। जेल में पैसे के दम पर मोबाइल इस्तेमाल करने से लेकर दूसरी सुख-सुविधाओं का लाभ लेने के आरोप पहले से लगते रहे हैं लेकिन एफटीसी कोर्ट में ऐसा प्रकरण आया जिसे गंभीरता से लेते न्यायाधीश सर्वेश कुमार पांडेय ने सख्त रुख अख्तियार किया है। दुष्कर्म के मामले में भदोही जेल में निरुद्ध स्वस्थ बंदी को मानसिक रोगी बताने के मामले में न्यायाधीश ने डीआईजी जेल को आदेश दिया है कि वह पूरे प्रकरण की जांच कराकर इस मामले में कारवाई करे। साथ ही कि गयी कारवाई से अदालत को भी अवगत कराएं। अदालत ने इसके साथ ही बंदी कमलदेव सिंह को जेल मैनुअल के अनुसार समुचित इलाज कराने का आदेश भदोही के जेल अधीक्षक को दिया है।

जेल ने मांगी अनुमति बंदी ने खुद को स्वस्थ बताया

प्रकरण के मुताबिक लंका क्षेत्र निवासिनी एक महिला ने दुष्कर्म समेत अन्य आरोप लगाते हुए अपने पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। तभी से उसके पिता जेल में है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमे की चल रही सुनवाई के दौरान भदोही के जेलर द्वारा 22 अक्टूबर को प्रार्थना पत्र दिया गया। जिसमें कहा गया कि मीरजापुर मंडलीय चिकित्सीय टीम द्वारा कमलदेव सिंह समेत कई बंदियों का मानसिक परीक्षण किया गया। इनमें कमलदेव सिंह सहित सात बंदियों को मानसिक रूप से बीमार बताते हुए मानसिक चिकित्सालय वाराणसी में रेफर करने की रिपोर्ट दी गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर जेलर ने बंदी कमलदेव सिंह को मानसिक चिकित्सालय में दाखिल करने की अनुमति देने की अपील की।

समुचित इलाज कराने का भी आदेश

दूसरी तरफ 29 अक्टूबर को अदालत में पेश कमलदेव ने बयान दिया कि वह पूर्ण रूप से स्वस्थ है। चिकित्सक तथा जेलर द्वारा उसके खिलाफ फर्जी रिपोर्ट अदालत में दी गई है। इसके अतिरिक्त बंदी कमलदेव द्वारा 20 नवंबर को अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र में किडनी व प्रोस्टेट की बीमारी से पीड़ित होने की बात बताते हुए उसके समुचित उपचार कराने की मांग की। जिसपर अदालत ने उसका समुचित उपचार कराने का आदेश दिया है।

Related posts