वाराणसी। पिछले कुछ हफ्तों से पूरे देश में नेशनल सिटिजन रजिस्टर (एनसीआर) को लेकर चर्चा छिड़ी है। बंगलादेशी घुसपैैठियों को लेकर एक तरफ जहां भाजपा हमलावर है तो दूसरी तरफ विपक्षी दल अपने तर्क दे रहे हैं। इस बीच मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में आये गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी मामले को लेकर कुछ रणनीति बनाते देखे गये। खास यह कि उनके साथ गोरखपुर मेडिकल कालेज कांड को लेकर चर्चा में आये डा. कफील और नदीम खान (यूनाइटेड अगेंस्ट हेट) गुफ्तगूं करते देखे गये। दोनों को आम लोग तो दूर खुफिया विभाग तक नहीं पहचानता था। काशी प्रवास के दौरान जिग्नेश की कार में इन दोनों को स्थान मिला था।

एनसीआर को लेकर सफाई की मुद्रा में थे जिग्नेश

यह ऐसा सुलगता मामला है जिसे लेकर मोदी-योगी पर हमला करने वाले जिग्नेश भी सफाई की मुद्रा में देखे गये। उनका कहना था कि मोदीजी दूसरे मोर्चों पर विफल रहे हैं जिससे ऐसे मामले लेकर आयेंगे। कुरेदे जाने पर भी वह यह कहे को तैयार नहीं थे कि अवैध रूप से रहने वाले बंगलादेशियों को बाह भेजा जाये या नहीं। कई बार पूछे जाने पर उनका कहना था कि देश में 40 करोड लोगों को रोटी नहीं मिल रही है तो यह भी रह जायेंगे तो क्या होगा? बहरहाल कमरे से लेकर कार तक जिग्नेश ने इन नये सहयोगियों से क्या चर्चा की किसी को पता नहीं चल सका।

नदीम तो मीडिया की क्लास लेने के थे पक्षधर

एनसीआर का मामला उछलता देख आसाम में यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के बैनर तले काम कर रहे नदीम खान आपा खो बैठे। उन्होंने तो यहा तक कह डाला कि एनसीआर का मुद्दा यहाा से लेकर दिल्ली तकउठाने वाले मीडियाकर्मियों की क्लास लेनी चाहिये। उन्हें हकीकत की जानकारी नहीं है। कुछ संभलते हुए कहा कि वहां की जेलों में जो पांच हजार लोग बंद उन्हें तो बंगलादेश भेज नहीं पाये और चले हैं 40 लाख को भेजने। यह चुनावी स्टंट हैं और मानवता के नाम पर इन लोगों का दमन नहीं होना चाहिये। सुप्रीम कोर्ट का भी यही मानना है जिससे अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

डा. कफील ने याद दिलायी बरसी

एक तरफ जहां नदीम खुल कर अपनी बात रख रहे ते तो दूसरी तरफ डाक्टर कफील मीडिया को याद दिला रहे थे कि एक दिन बाद बीआरडी मेडिकल कालेज में मरे बच्चों की बरसी है। योगी से सवाल पूछा जाना चाहिये कि ऐसा क्यों हुआ। खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने इसे साजिश करार दिया।

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