इस कदर किया था परेशान कि विवाहिता ने आग लगा कर दे दी थी जान, कोर्ट ने दोषी मानते हुए सुनाया यह फैसला

वाराणसी। दहेज उत्पीड़न व आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में एडीजे (चतुर्थ) मो. गुलाम उल मदार की अदालत ने शुक्रवार को आरोपित पति दिव्यांश पाण्डेय उर्फ टिंकू को दोषी पाने पर दस वर्ष के कठोर कारावास व 40 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। वही साक्ष्य को छिपाने के आरोप में सास बिंदू पाण्डेय उर्फ बिंदो को दोषी पाने पर तीन वर्ष के कारावास व 10 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अलबत्ता कोर्ट ने इस मामले में सहआरोपित ससुर विनोद पाण्डेय व जेठ विवेक पाण्डेय को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

विवाह के दो साल बाद हुई थी घटना

अभियोजन की ओर से प्रभारी डीजीसी मुन्नालाल व सहयोगी सर्वेंद्र कुमार सिंह के अनुसार गजाधरपुर (रोहनिया) निवासी शिवराम पाण्डेय ने 23 जुलाई 2012 को सिगरा थाने में रपट दर्ज कराई थी। आरोप था कि उसके पुत्री स्नेहलता का विवाह वर्ष 2010 में सिखड़, चुनार निवासी दिव्यांश पाण्डेय के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही पति, सास, ससुर व जेठ दहेज में 50 हजार रुपए, फ्रिज व वाशिंग मशीन की मांग को लेकर आएदिन उसकी पुत्री को प्रताड़ित करते थे। उनलोगों ने मांग पूरी न होने पर 21 जुलाई 2012 को सोनिया स्थित अपने मकान पर मेरी पुत्री स्नेहलता को जलाकर मार दिया। उसके बाद एक अज्ञात व्यक्ति ने वादी को देर रात में इसकी सूचना दी। जब वादी मौके पर पहुंचा तो देखा कि उसकी लड़की का पूरा शरीर जला हुआ बिस्तर पर पड़ा है।

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