गाजीपुर। किसी फिल्मी कहानी की तरह कुंडेसर चट्टी पर 27 साल पहले हुई वारदात की विवेचना भी पुलिस ने उसी तर्ज पर कर दी थी। इसी का नतीजा रहा कि कोर्ट में यह टिक नहीं पायी। इस दुुस्साहसिक वारदात की रपट लिखाने वाला कोई और नहीं बल्कि सीबीआई से लेकर इंटरपोल तक से वांछित लाखों का इनामी अताउर्रहमान था। इनाम घोषित होने के बाद उसके बारे में दावा किया जाता है कि वह दूसरे देश चला गया और वहीं पर शरण ले ली है। रही सही कसर शिनाख्त को लेकर फंसे पेंच ने पूरी कर दी। बचाव पक्ष ने अपनी दलीलों से चश्मदीद के बयान पर सवालिया निशान खडे कर दिये। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने और साक्ष्य के अवलोकन के बाद एमएलसी बृजेश को साथी त्रिभुवन समेत बरी करने का फैसला सुनाया।

घटना के पहले वाहन रुकवा कर उतर गया वादी

भांवरकोल थाने में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक जिस जीप से अफजाल असांरी चुनाव प्रचार के लिए चलते थे उसी पर सवार होकर दूसरे लोग निकले थे। एक स्थान पर वादी ने जीप रुकवा कर इसके गर्म होने का वास्ता देकर पानी लाने की बात कही थी। इसी दौरान विपरीत दिशा से आयी कार से अंधाधुंध फायरिंग होने लगी। मुकदमे के ट्रायल के दौरान इनामी होने के चलते वादी कोर्ट में आया ही नहीं।

दूसरी बार में की थी शिनाख्त

मुकदमे के अहम गवाह रिटायर्ड फौजी कैप्टन जगन्नाथ सिंह को कोर्ट ने वीडियो कांफ्रेसिंग के दौरान आरोपितों की पहचान का मौका दिया था। पीलीभीत जेल में निरुद्ध दूसरे बंदी की पहचान त्रिभुवन के रूप में उन्होंने की थी। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर वीडियो कांफ्रेसिंग के बदले कोर्ट में शिनाख्त का मौका दिया गया था। वारदात के 24 साल बाद गवाह ने कोर्ट में बृजेश को पहचाना लेकिन बचाव पक्ष ने जिरह के दौरान इस पर सवालिया निशान लगा दिया। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाइकोर्ट तक की शिनाख्त को लेकर रूलिंग लगा कर पेंच फंसा दिया।

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