सोशल मीडिया में जोरों पर चर्चा, ‘विकास पुरुष’ का प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर होगा ‘कब्जा’

लखनऊ। लोकसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली भाजपा को अगल छह माह में एक और परीक्षा देनी है। प्रदेश के 11 विधायक सांसद चुने जा चुके हैं जिनकी रिक्त सीटों पर उपचुनाव होने हैं। सूबे में सरकार बनने के बाद उपचुनावों को लेकर ट्रैक रिकार्ड पहले से अच्छा नहीं रहा है। पिछला बार तो भाजपा न सिर्फ सीएम योगी की गोरखपुर और डिप्टी सीएम केशव मौर्या की सीट फूलपुर हारी थी बल्कि उसे कैराना के अलावा दूसरी सीटों पर पराजय का सामना करना पड़ा था। प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे डा. महेन्द्रनाथ पाण्डेय केन्द्र के कैबिनेट मंत्री हो चुके हैं लिहाजा उनके स्थान पर आने वाले को ही इस चुनौती का सामना करना होगा। सोशल मीडिया में चल रही चर्चाओं के मुताबिक पूर्व केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा को यह जिम्मेदारी मिल सकती है।

सीएम के बराबर मानते हैं समर्थक

गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने दूसरे सभी दलों का सूपड़ा साफ कर दिया था तो मुख्यमंत्री के लिए जो पहला नाम चर्चा में आया था वह मनोज सिन्हा का था। समर्थक उनको ‘विकास पुरुष’ की संज्ञा देते हैं। यह बात दीगर है कि जिन विकास कार्यो के बूते वह चुनावी रण में उतरे थे वह जनता के मानकों पर खरे नहीं उतरे। नतीजा, चुनाव में लगभग सवा लाख वोटों के अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद उनको केन्द्रीय मंत्रिमंडल में लेने की चर्चा थी लेकिन अब एक बार फिर से प्रदेश अध्यक्ष बनाने का हल्ला जोरों पर है। उनके समर्थक सीएम योगी से कम नहीं मानते हैं और दावा है कि इस बार बराबर का दर्जा देने को लेकर सहमति बन चुकी है।

अब तक केन्द्रीय राजनीति में रहे

मनोज सिन्हा बीएचयू छात्रसंघ के अध्यक्ष रहने के बाद प्रदेश की राजनीति के बदले पहली बार ही सीधे सांसद चुने गये। तीन बार सांसद और केन्द्रीय मंत्री के रूप में अपनी छाप छोड़ने वाले मनोज सिन्हा इससे पहले कभी प्रदेश की राजनीति में सक्रिय नहीं रहे हैं। देखना हैै कि प्रदेश की जिम्मेदारी मिलने के बाद वह इसका निर्वहन किस तरह करते हैं।

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