वाराणसी। अरसे से गंगा की अविरलता और निर्मलता को लेकर संघर्ष कर रहे स्वामी सानंद (प्रो. जीडी अग्रवाल) का गुरुवार की दोपहर हमेशा के लिए आंखें मूंद ली। स्वामी सानंद 22 जून से अनशनरत थे। बुधवार को स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आने के कारण उन्हें एम्स ऋषिकेश में दाखिल कराया गया था। करीबियों की माने तो शुगर लेबल 55 के करीब पहुंच जाने से स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट आ रही थी और सांस लेने में दिक्कत भी होने लगी थी। मौत के बाद उनका अंतिम पत्र वायरल हो रहा है। हर कोई इसकी अपने तरह से व्याख्या कर रहा है। अलबत्ता इसे देखने से स्पष्ट हो रहा है कि स्वामी सानंद अपने अंतिम समय में राजनीतिज्ञों से अधिक धर्म के ‘पैरोकारों’ से क्षुब्ध थे। पत्र की अंतिम पंक्तियों में पूर्व सीएम के आने से लेकर पीएम तक बाद पहुंचाने की जिक्र किया है।

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अंतिम आखर में झलकी पीड़ा

स्वामी सानंद ने 9 अक्टूबर की दोपहर तीन बजे लिखे पत्र में ‘गुरुजी’ के पत्र मिलने का जिक्र करते हुए पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने लिखा कि वेद वेदांत विज्ञ गुरुजी जिन्होंने मकर संक्रांति 2012 गंगासागर में मुझे गंगा तपस्या और कुछ माह बाद जबलपुर में जल भी त्याग देने का संकल्प दिलाया था वह इस जीर्ण-शीर्ण शरीर को बचाने के लिए इतने चिंतित। आगे लिखा है कि मुझे तो इस पत्र में माननीय शंकराचार्य स्वरुपानंद सरस्वती के कायरतापूर्वक शरीर मोह व भक्त मोह की गंध और राजेन्द्र सिंह जी के सामाजिक मानसिकता की छाप जैसा कुछ प्रतीत हुआ। उन्होंने सवाल भी उठाये कि पिछले पांच सालों में मेरी क्षमता और कर्मठता का क्या उपयोग होता रहा जो इसका महत्व और आवश्यकता इतना बढ़ गया।

कबीर की भांति शरीर को लेकर दावे

स्वामी सानंद के गुरू अविमुक्तेश्वरानंद ने हत्या की आशंका जताते हुए उनके शव का पोस्टमार्टम कराने के साथ ही सीबीआई जांच की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने स्वामी सानंद की अंतिम इच्छा के अनुसार उनकी देह को काशी हिंदू विश्वविद्यालय को सौंपने का आग्रह किया है। दूसरी तरफ गंगा महासभा के स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती का कहना है कि वह काफी दुखी है। स्वामी सानंद गंगामहासभा परिवार के सदस्य होने के साथ-साथ हम सबके अभिभावक भी थे। उनका जाना मेरे जीवन की अपूर्णीय क्षति है। उनके सपनों को गंगा महासभा पूरा करेगी। जहां तक शरीर का सवाल है तो अनशन शुरू करने के पहले साफ वसीयत की और शरीर एम्स को दान कर दिया था। इसकी तमाम कानूनी औपचारिकता पूरी कर ली थी। जिस वसीयत का जिक्र किया जा रहा वह पुरानी है।

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