वाराणसी। माफिया से माननीय बने एमएलसी बृजेश सिंह की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सिकरौरा कांड की वादिनी और अहम गवाह हीरावती ने बृजेश सिंह के खिलाफ लम्बित गैंगेस्टर एक्ट के मामले में गवाही के लिए आवेदन दिया था। हीरावती का आवेदन था कि गैंगस्टर मामले में सिकरौरा कांड को शामिल किया गया। बावजूद इसके गवाह के रूप में उसका नाम नहीं है। विशेष न्यायाधीश (गैंगेस्टर) राजीव कमल पाण्डेय की अदालत ने हीरावती का बयान दर्ज किये जाने के बाबत दिए गए आवेदन को शुक्रवार को खारिज कर दिया। अलबत्ता अदालत ने अभियोजन के उस आवेदन को स्वीकार कर लिया जिसमे सिकरौरा नरसंहार की तहरीर,चिक, एफआईआर व आरोप पत्र की सत्य प्रतिलिपि को साक्ष्य के रूप में ग्राह्य किये जाने का अनुरोध किया था। साथ ही कोर्ट ने आरोपी एमएलसी बृजेश सिंह का अंतिम बयान दर्ज करने लिए 18 जनवरी की तिथि नियत कर दी।

बचाव पक्ष ने किया था जबरदस्त विरोध

अदालत में आरोपित एमएलसी बृजेश सिंह के अधिवक्ता दीनानाथ सिंह, अशोक सिंह प्रिन्स,शैलेन्द्र सिंह ने हीरावती के आवेदन पर आपत्ति जताते हुए कहा था गैंगेस्टर एक्ट के मामले में इनकी गवाही का औचित्य नही है। यह मामला सरकार दर्ज करती है और इसमे वादी भी सम्बंधित थाने की पुलिस रहती है। कानून में ऐसी गवाही की व्यवस्था नहीं है। हीरावती के विधिक पैैरोकार राकेश न्यायिक का कहना था कि कोर्ट ने आंशिक रूप से मांग स्वीकार की है। बहरहाल इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जायेगी जिससे गैंगस्टर मामले में भी हीरावती गवाही दे सके।

admin

No Comments

Leave a Comment