मऊ। ठेकेदार अजय प्रकाश सिंह उर्फ मन्ना सिंह की आठ साल पहले हुई हत्या के मामले में गवाह रामसिंह मौर्या और उनकी सुरक्षा में लगे सिपाही सतीश की हत्याकांड के मामले में आरोपी सदर विधायक मुख्तार अंसारी को बादा जेल से लाकर बुधवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) डा. अजय कुमार की अदालत में पेश किया गया। एडीजे ने मामले में अभियोजन का साक्ष्य पूरा हो जाने के बाद आरोपियों का सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज किया। बयान मुल्जिम के बाद एडीजे ने मामले में सफाई साक्ष्य के लिए 28 मार्च की तिथि नियत की है। मुख्तार अंसारी की पेशी के मद्देनजर कचहरी परिसर में सुरक्षा का व्यापक बंदोबस्त किया गया था। इसमें सीओ मधुबन, सीओ सिटी, कोतवाल सुरेश कुमार मिश्रा, महिला एसओ अनिता सिंह के अलावा काफी संख्या में पुलिस और पीएसी तथा एलआईयू तैनात रही।

क्या था मामला

अभियोजन के मुताबित ठेकेदार अजय प्रकाश सिंह उर्फ मन्ना सिंह की हत्या के मामले में गवाह रहे रामसिंह मौर्या और सुरक्षा में लगा सिपाही सतीश की 19 मार्च 2010 को तत्कालीन एआरटीओ कार्यालय के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बावत वादी मुकदमा अशो‌क सिंह की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें सदर विधायक मुख्तार अंसारी सहित पांच लोगों को नामजद तथा कुछ अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने विवेचना के बाद मुख्तार अंसारी, रामदुलारे, अनुज कन्नौजिया, पंकज यादव, रामू मल्लाह, राकेश उर्फ हनुमान पांडेय, शिवशंकर यादव, धर्मेन्द्र सोनकर, राजेश सिंह उर्फ राजन सिंह, बृजेश सोनकर और जामवंत उर्फ राजू के विरूद्ध आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी शिवदत यादव और मणिबहादुुुुर सिंह तथा अधिवक्ता फतेहबहादुर सिंह, अमरनाथ सिंह ने वादी सहित कुल 16 गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। अभियोजन का साक्ष्य पूरा होने के बाद बुधवार को आरोपियों का बयान धारा 313 सीआरपीसी के तहत दर्ज हुआ।

मुख्तार ने दी सफाई, फंसाया राजनैतिक प्रतिद्वंदिता में

सदर विधायक मुख्तार अंसारी ने अपने बयान में कहा कि वह 2005 से जेल में बंद है। राजनैतिक प्रतिद्धंदिता के चलते उन्हें मन्ना सिंह की हत्या में फंसाया गया था। इस मामले में भी उसी के चलते फसाया गया है। आरोपियों का बयान दर्ज होने के बाद मामले में सफाई साक्ष्य के लिए 28 मार्च 2018 की तिथि नियत कर दिया। गौरतलब है कि कुछ माह पहले मन्ना सिंह हत्याकांड में साक्ष्य के आभाव में मुख्तार को बरी किया गया था।

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