चंदौली। एसडीेम सदर आशीष कुमार के आफिस में सदर तहसीलदार फूलचंद्र से वकीलों द्वारा हाथापाई, गाली-गलौज व मारपीट के मामले ने शुक्रवार को नया मोड़ ले लिया। सदर तहसीलदार ने कोतवाली में तहरीर देकर तीन नामजद और 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ रपट दर्ज करायी है। इसकी भनक मिलने पर अधिवक्ता भी भड़क गये हैं। बार एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य डा. वीरेंद्र प्रताप सिंह ने चेताया है कि अधिवक्ताओं के खिलाफ यदि जिला प्रशासन द्वारा कार्यवाही की जा रही है तो कल वकीलों द्वारा भी इनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही कर उन्हें अपनी गलती का एहसास करा दिया जायेगा। जिस कर्मचारी को उसका कर मुकदमे की बात कही जा रही है वह सरासर गलत है क्योंकि हम अधिवक्ता गण शांतिपूर्ण कार्य करने के लिए कह रहे थे।

मामूली बात को लेकर बढ़ा था विवाद

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले एक अमीन के धावक द्वारा वकीलों में कहासुनी व मारपीट के मामले को लेकर सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसको लेकर जब तहसील स्थित एसडीएम सदर के कमरे में वकील इकट्ठा हुए तो कहासुनी इतना बढ़ गया कि उन लोगों द्वारा तहसीलदार के ऊपर सुलह कराने का दबाव दिया जा रहा था। इस पर तहसीलदार का कहना था कि यह न मेरा मामला है और ना ही मेरे द्वारा किसी प्रकार की कार्यवाही की गई है। इस पर बात इतनी बढ़ गई कि वकील व तहसीलदार के बीच कहासुनी के बाद हाथापायी और गाली-गलौज की नौबत आ गई। बीच बचाव कर रहे सदर एसडीएम आशीष कुमार को भी वकीलों ने धक्का देकर अपनी बात मनवाने के लिए जोर दिया।

आला अधिकारियों के हस्तक्षेप पर दर्ज हुई रपट

फौरी तौरपर अधिवक्ता गण शांत हुए और तहसीलकर्मियों की नाराजगी के बाद मामला तूल पकड़ता गया। मामले को लेकर एसडीएम सदर व तहसीलदार सदर ने डीएम से वार्ता कर इन अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्यवाही की मांग की। इस पर तीन अधिवक्ता जितेंद्र कुमार सिंह राज बहादुर सिंह और संतोष पांडे के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। साथ ही 20 अज्ञात अधिवक्ताओं को देखने पर पहचानने की बात कही है। इंस्पेक्टर कोतवाली आशुतोष ओझा ने स्वीकार किया कि रपट दर्ज कर विवेचना की जा रही है।

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