बलिया। लंबे समय तक भाजपा से जुड़े रहे निष्ठावान कार्यकर्ता राजीव मोहन चौधरी ने कभी सोचा भी नहीं था कि सूबे में अपनी सरकार बनने के बाद बेटे के संग हवालात की हवा खानी पडेगी। वह भी किसी अपराध के चलते नहीं बल्कि थानेदार के गलत ‘कृत्य’ का विरोध करने पर। मामले की जानकारी मिलते पर बड़े नेताओं ने उच्चाधिकारियों से बात की, तब जाकर राजीव मोहन अपने बेटे के साथ हवालात से बाहर हुए थे। भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता के साथ हुई पुलिसिया कार्रवाई से भाजपा कार्यकतार्ओं में जबरदस्त नाराजगी थी। मामले को शासन ने गंभीरता से लेते हुए जांच का आदेश दिया था। जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर एसपी श्रीपर्णा गांगुली ने बांसडीह रोड के थानेदार सत्येन्द्र राय के अलावा कांस्टेबल अखिलेश यादव, रणजीत सिंह व अभिषेक को लाइनहाजिर कर दिया है।

वाहन चेकिंग के दौरान हुआ था विवाद

गौरतलब है कि बलिया नगर पालिका परिषद के पूर्व चेयरमैन हरेराम चौधरी के पुत्र व 1982 से विद्यार्थी परिषद से राजनीति शुरू करने वाले राजीव मोहन चौधरी व उनके बेटे उत्कर्ष राय की बांसडीह रोड पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान कहासुनी हो गयी थी। उत्कर्ष राय पैतृक गांव सलेमपुर से दूध लेकर तिखमपुर स्थित अपने आवास पर आ रहा था। इसी बीच, बांसडीहरोड पुलिस ने उसे रोककर बाइक का कागज मांगा। उत्कर्ष ने मूल कागज घर पर होने की बात कहकर फोटोकापी दिखायी लेकिन ‘खाकी वर्दीधारियों’ ने इसे मानने से इनकार कर दिया। उत्कर्ष ने घटना की जानकारी अपने पिता को मोबाइल से दी जिस पर वह मूल कागज लेकर वाहन चेकिंग स्थल पर पहुंचे। उन्होंने अपना परिचय भी दिया, लेकिन पुलिस ने उनकी एक बात नहीं सुनी। इसको लेकर पुलिस से झड़प भी हो गयी। फिर पुलिस उनके बेटे उत्कर्ष को हवालात में डालने के लिए खींचने लगी, जिस पर राजीव मोहन ने कहा कि वह बच्चा है उसके साथ मुझे भी हवालात में डाल दीजिए। फिर क्या था पुलिस ने उत्कर्ष के साथ ही प्रदेश परिषद के सदस्य राजीव मोहन चौधरी को भी हवालात में डाल दिया था।

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