एनजीटी ने कसे पेंच तो डीएम ने दिया पांच क्रेशर बंद करने का आदेश, जब्त होगी बैंक गारंटी और लगेगा जुर्माना

सोनभद्र। प्रदेश के दूसरे हिस्सों की तरह सोनभद्र में अवैध तरीके से संचालित स्टोन क्रशर एवं बालू की खदानों के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाते हुए कार्यवाहियों का आदेश दिया है। एनजीटी का रुख भांप कर डीएम ने पांच क्रेशर को बंद करने के आदेश दिया है। डीएम ने यह कार्रवाई सकृत क्षेत्र में चल रहे क्रेशरों की जांच के संबंध में बनी कमेटी की संस्तुतियों के आधार पर की है। खास यह कि कार्रवाई तब जाकर की गयी जब एनजीटी ने यूपी पल्यूशन बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी को इस निर्देश के साथ भेज दिया है कि सम्बंधित धारा में नियमानुसार करवाही करें। आदेश में यह भी कहा गया है कि पर्यावरण के सुधार के लिए योजना बनायी जानी जरूरी है। क्षति का अनुमान लगाकर प्रदूषणकर्ताओं से क्षतिपूर्ति वसूलने की योजना बनायी जाना भी आवश्यक है।

कई महीनों से चल रहा था मामला

गौरतलब है कि चौधरी यशवंत सिंह बनाम यूनीयन आफ इंडिया का मामला एनजीटी में काफी समय से चल रहा था। यहीं से मिले आदेश के बाद डीएम ने कमेटी गटिथ कर जांच को भेजी थी। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि एक प्लांट जहां पावर कारपोरेशन के बंदी के आदेशों की अवहेलना हो रही थी को तत्काल संयुक्त टीम द्वारा सील कर दिया गया। अन्य चार स्टोन क्रशर प्लांटों पर पर्यावरण सम्बंधी मानकों का उल्लंघन पाया गया। इन प्लांटों पर एयर प्रीवेन्शन एंड कंट्रोल आफ पल्यूशन एक्ट 1981 की धारा 31 के अंतर्गत कार्यवाही की संस्तुति की गयी थी। संयुक्त कमेटी ने चार नदी तलों का निरीक्षण किया जिसमें पाया गया कि किसी ने भी पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया है। साथ ही किसी भी प्रकार के सीएसआर के अंतर्गत सामाजिक दायित्वों की पूर्ति हेतु कोई कदम नहीं उठाया है।

मानको का पालन नही, सड़क की क्षतिग्रस्त

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारी वाहनों के आवागमन से सम्पर्क मार्गों के क्षतिग्रस्त होने की शिकायत मिली थी। वन विभाग द्वारा तत्संबंधी दी गयी अनुमति को निरस्त कर दिया गया और बैंक गारंटी के रूप में दिया गया रुपया 50 हजार जब्त कर लिया गया है। यहां पर जो वायु गुणवत्ता जांच केंद्र बनाकर रिपोर्ट भेजनी थी जो नहीं किया गया। साथ ही पेयजल के लिए 500 हैंड पम्प,स्ट्रीट सोलर लाइट,स्कूलों में दो टायलेट एवं रेन वाटर हरवेस्टिंग सिस्टम भी आवश्यक थे जो नहीं लगवाए गए। इसके अतिरिक्त हरित क्षेत्र भी नहीं बनाए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि सम्पर्क मार्ग के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण स्थानीय लोगों को कठिनाई झेलनी पड़ी इसके कारण आशीष खेमका के पक्ष में जारी खनन पट्टा निरस्त कर दिया जाना चाहिए।

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