वाराणसी। एक दशक से अधिक समय तक पुलिस के लिए चुनौती रहे कुख्यात इनामी अपराधी रईस को लेकर पुलिस देर रात तक पसोपेश में थी। दरअसल दशाश्वमेध इलाके में अलग-अलग स्थानों कुछ देरी के अंतराल में दो के शव मिलने और एक की शिनाख्त न होने पर पुलिस दबाव में थी। बाद में एक को लेकर चर्चा शुरू हुई कि वह रईस बनारसी है तो पुलिस ही नहीं एसटीएफ तक ने राहत महसूस की। चर्चाओं की माने तो रईस अपने एक साथी के संग पातालेश्वर मुहल्ले में राकेश अग्रहरि (32) ननामक युवक की हत्या के इरादे से पहुंचा था। रईस ने उसे गोली मार भी दी लेकिन क्रास फायरिंग में उसके गले में गोली लग गयी। वहां से साथी बाइक पर लेकर भागा लेकिन नई सड़क पर गिरने के बाद रईस ने मस्जिद में जाने की कोशिश की।

प्रभु साहनी का बदला लेने तो नहीं आया था

अपराध जगत में व्याप्त चर्चाओं के मुताबिक पिछले दिनों गोली का शिकार बने सपा नेता प्रभु साहनी से रईस के करीबी संबंध थे। पट्टीदारों से प्रभु की सुपारी देकर हत्या करायी थी लेकिन राकेश अग्रहरि संदेह के दायरे में था। उसे सबक सिखाने और करीबी की हत्या का बदलवा लेने की खातिर रईस साथी के संग बाइक से पहुंचा था। राकेश को भी इसका अंदेशा था जिससे वह भी अवैध असलहे से लैस था लेकिन रईस को इसकी भनक नहीं थी। नतीजा रईस ने गोली मार दी लेकिन मरने के पहले राकेश ने उसे भी निशाना बना दिया। राकेश का नाम उस समय भी चर्चा में आया था जब 30 अप्रैल 2017 को अपनी सौतेली माँ मीरा अग्रहरि को दो गोली मारकर उनकी हत्या का प्रयास किया था। उसके पिता बंशी अग्रहरि ने दो विवाह किये हैं और मुहल्ले में ही परचून की दुकान चलाते हैं।

संगीन मामलों से जुड़ा था रईस का नाम

मूल रूप से कानपुर के रहने वाले रईस बनारसी का नाम पहली बार उस समय सुर्खियों में आया था जब पेट्रोल पंप मालिक लाहिड़ी की गोली मार कर हत्या के संग लाखों रूपये लूट लिये थे। इसके बाद उसने कई सनसनीखेज वारदातों को अंजाम दिया। अंतिम बार 2011 में गिरफ्तारी के बाद उसे दूसरी जेल भेजा जा रहा था लेकिन फिल्मी तरीके से फरारी के बाद फिर वह हत्थे नहीं चढ़ा। रईस के मारे जाने की भनक मिलने के बाद आईजी रेंज, एसएसपी समेत दूसरे अधिकारी घटनास्थल से लेकर अस्पताल तक पहुंचे। पुष्ट शिनाख्त के प्रयास किये जा रहे थे।

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