वाराणसी। अपर जिला जज (चतुर्थ) मुहम्मद गुलाम उल मदार की अदालत ने गोली मारकर हत्या करने के मामले में आरोपी चर्चित संतोष शुक्ला, मनीष सिंह, सन्नी सेठ व राकेश तिवारी को आरोप सिद्ध न होने पर संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अभियोजन के अनुसार अदलपुरा निवासी चंद्रशेखर प्रजापति ने लक्सा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि पिता शिवचरण प्रजापति लक्सा क्षेत्र में स्थित रमाशंकर जायसवाल के सरकारी भांग के ठेके पर सेल्समैन थे। इस दौरान 17 फरवरी 2011 की रात करीब साढ़े 9 बजे आरोपित कोनिया निवासी संतोष शुक्ला, चंदवक जौनपुर निवासी मनीष सिंह, रानीपुर महमूरगंज निवासी सन्नी सेठ व औसानगंज निवासी राकेश तिवारी दुकान पर पहुंचे और भांग के साथ गांजा भी बेचने का दबाव बनाने लगे। विरोध करने पर आरोपियो ने उसके पिता को गोली मार दी। घायलावस्था में उसके पिता को उपचार के लिए मलदहिया स्थित एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसके पिता की मौत ही गयी।

बचाव पक्ष ने मृत्युपूर्व बयान संदिग्ध बताया

अदालत में बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनुज यादव व बिपिन शर्मा ने कहा कि मृतक ने जो मृत्यु पूर्व विवेचक को बयान दिया है वह संदिग्ध है। दरअसल मृतक घटना के बाद से मृत्यु होने तक बेहोशी की हालत में था और बोलने की स्थिति में नहीं था। इसके अलावा विवेचक के बयान लेने के समय मे कोई तारतम्यता नहीं है। इसके अलावा आरोपियों से बरामद आला कत्ल भी विधि बिज्ञान प्रयोगशाला में परीक्षित नही हो पाया है। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

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