जीत की हो आस तो अच्छे लगते हैं ‘दाग’, कांग्रेस के बाद बसपा ने भी ‘दमदार’ प्रत्याशियों पर जताया विश्वास

लखनऊ। सत्ता पाने की खातिर चुनाव में जीत हासिल करनी होती है और इसके लिए राजनैतिक दल भले दूसरे का दामन दागदार बताते हो लेकिन बात जिताऊ प्रत्याशी की हो तो उन्हें भी ‘दाग’ अच्छे लगे हैं। लोकसभा चुनावों में जीत हालिक कर उत्तर प्रदेश में अपना बजूद बचाने की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस को अब न तो अरबों रुपये के एनएचआरएम घोटाले में कोई खामी नजर आती है न ही इसके केन्द्र बिन्दु रहे बाबू सिंह कुशवाहा से गठबंधन करने में। अब तक जिन्हें बाहुबली कह कर कोसती थी उसी रमाकांत यादव को कांग्रेस ने सदस्यता देने के अगले दिन टिकट भी दे दिया। बसपा ने भी एक दशक पुराना फार्मूला अपनाते हुए बाहुबलियों के संग ‘दागियों’ पर विश्वास जताया है।

बसपा की सूची में कई बाहुबली शामिल

बहुजन समाज पार्टी ने रविवार को यूपी के जिन 16 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की उनमें कइयों का दामन दागदार रहा है। मऊ सदर के बाहुबली मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल जहां गाजीपुर से प्रत्याशी हैं तो लेप्टीनेंट माने जाने वाले अतुल राय को घोसी से टिकट दिया गया है। यहां से मुख्तार के पुत्र अब्बास ने भी जोर लगाया था लेकिन ‘अपनों’ से ही मात मिली। इसी तरह पूर्वांचल के चर्चित नाम हरिशंकर तिवारी पुत्र भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी को संतकबीर नगर से तो सुल्तानपुर से चंद्रभान सिंह सोनू को प्रत्याशी बनाया गया है। आय से अधिक सम्पति के मामले में जेल जा चुके रंगनाथ मिश्रा भदोही से बसपा प्रत्याशी हैंं।

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