लखनऊ। नकली और जहरीली शराब के चलते मौतों पर अंकुश लगाने में होलोग्राम प्रभावी साबित नहीं हो रहा था। जहां भी अवैध शराब बरामद होती उस पर होलोग्राम लगा रहता। नयी आबकारी नीति में इस साल से होलोग्राम के बदले आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जायेगा। एनआईसी ने ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली का जो साफ्टवेयर विकसित किया है उससे शराब की बोतलों पर बार/क्यूआर कोड रहेगा। इससे शराब निर्माण से लेकर बिक्री तक की पूरी कहानी विभाग को जानने में चंद सेकेंड लगेंगे। शासन ने आबकारी आयुक्त को आदेश दिया है कि वह वह इसे तत्काल सुनिश्चित करायें।

होलोग्राम से सस्ती नयी प्रणाली

प्रदेश की डिस्टलरी प्रति होलोग्राम 37 पैसे की भुगतान करती थी लेकिन नयी प्रणाली में यह खर्च 15 पैसे प्रति बोतल रहेगा। होलोग्राम आपूर्ति करने वाली कंपनी को नोटिस देने के साथ उसकी जमानत राशि को वापस करने का आदेश जारी हो चुका है। नये साफ्टवेयर के जरिये शीरा निर्माण से लेकर उपभोग करने कीा खातिर बिक्री तक का पूरा इतिहास कोड के रूप में दर्ज किया जायेगा।

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