मीरजापुर। जिले के कप्तान आशीष तिवारी आईआईटी खड्गपुर से इंजीयरिंग की डिग्री लिये हैं। प्रदेश के आईपीएस में उन्हें टेक्नोफ्रेंड माना जाता है। अधीनस्थों को भी टेक्नोलाजी के जरिये वह नकेल कसे रहते हैं। बावजूद इसके उनके नाम पर फर्जी ट्विटर एकाउंट बनाकर ट्विट करने का अंतहीन सिलसिला आरम्भ हुआ तो वह विश्वास न कर सके। दशा यह हो चुकी थी कि फर्जी ट्विटर एकाउंड को फालो करने वालों की संख्या 11 हजार को पार हो गयी। मामले को चुनौती के रूप में लेते हुए उन्होंने तलाश शुरू की तो आरोपित पकड़ में आ गया। शनिवार को पुलिस ने आरोपित युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। युवक का एकाउंट भी पुलिस ने बंद करा दिया है।

ख्याति सुनकर बदला ट्विटर एकाउंट में नाम

पुलिस लाइंस में गिरफ्तार युवक को मीडिया के सामने पेश करते हुए एसपी ने बताया कि गिरफ्तार युवक पटना का रहने वाला है और मगध विश्वविद्यालय में का बीसीए का छात्र है। गिरफ्तार युवक आशीष तिवारी पुत्र बसन्त लाल तिवारी निवासी कलिकेत नगर पटना का ट्विटर एकाउंट 2015 में बना हुआ था। इसी को बाद में बदलकर आईपीएस आशीष तिवारी के नाम पर कर दिया जिससे फोटो और मैसेज ट्वीट किया जा रहा था। मामला खुलने पर तत्कालीन पीआरओ वैभव सिंह कि तहरीर पर आईपीसी कि धारा कई धाराओं के साथ ही आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद युवक ने कबूल किया कि वह बिहार से अपने परिजनों के साथ विंध्यचाल आया था। उसे यहां तैनात एसपी आशीष तिवारी की ख्याति सुनने को मिली। वापस बिहार जा कर वह खुद ही ट्विटर एकाउंट को आईपीएस अधिकारी के नाम पर बना कर ट्वीट करने लगा।

पुलिस को करनी पड़ी थी अपील

फर्जी ट्विटर एकाउंट को असली मान कर 11 हजार से अधिक लोगों ने फॉलो भी करना शुरू कर दिया। जब ट्विटर एकाउंट की जानकारी पुलिस को मिली को एसपी ने इस फर्जी एकाउंट के बारे में जागरूक किया और इसे बंद कराया गया। पुलिस के आधिकारिक ट्विटर सेल ने भी इस फर्जी एकाउंट से बचने कि अपील करते हुए एसपी का असली ट्विटर एकाउंट जारी किया था।

admin

No Comments

Leave a Comment