‘हाथ’ को था पसंद जिसका ‘साथ’ उसके खिलाफ शुरू की पोस्टर वार, अखिलेश पर कांग्रेस का सीधा प्रहार

आजमगढ़। पिछले विधानसभा चुनावों में प्रशांत किशोर (पीके) के सहारे मैदान में उतरी कांग्रेस को जमीनी हकीकत का एहसास हुआ तो उसने सत्तारूढ़ सपा से साथ गठबंधन में भलाी समझी। जिस सपा के खिलाफ ‘खाट’ लेकर वह मतदाताओं के बीच गयी थी वह ‘गायब’ होने लगी तो समझौता कर लिया। उस समय नारा लगा था ‘यूपी को यह साथ पसंद है’। चुनाव परिणाम आये तो कांग्रेस दहाई तक नहीं पहुंच सकी। अपना दल सरीखी पार्टी से भी कम सीटे मिली। इसके बाद लोकसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच लाग-डाट शुरू हुई। अब बिलरियागंज की घटना के बाद सियासत ने दूसरा रंग दिखाना शुरू कर दिया है।

अखिलेश के ‘मुंह’ पर दिखायी पट्टी

गौरतलब है कि बिलरियागंज मामले में समाजवादी पार्टी ने पहले दिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर सरकार को घेरा था। अब कांग्रेस ने सपा मुखिया और स्थानीय सांसद अखिलेश सिंह यादव के खिलाफ पोस्टर वार शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की ओर से शहर में पोस्टर लगाए गए हैं। इसमें कांग्रेस ने सवाल किया है कि सीएए और एनआरसी विरोधी प्रदर्शन के दौरान मुस्लिम महिलाओें पर पुलिसिया बर्बरता पर अखिलेश यादव क्यों चुप हैं। अखिलेश यादव 2019 के चुनावों के बाद से आजमगढ़ से लापता हैं। पोस्टर पर अखिलेश यादव की फोटो लगाई गई है और फोटो के मुंह पर पट्टी लगाई गई है।

वोट बैंक की लड़ाई पोस्टर पर आयी

कांग्रेस के पोस्टर वार को सियासी नजरिए से देखा जा रहा है। दरअसल सपा हमेशा मुसलमानों की हितैषी होने का दावा करती रही है। इस वोट बैंक को अब काग्रेस अपे पाले में खींचना चाहती है। कहना न होगा कि 2014 के चुनाव के बाद जब मुलायम सिंह चुनाव जीतने के बाद आजमगढ़ नहीं आए तो भाजपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नेता सुफियान खान ने सगड़ी क्षेत्र में पोस्टर लगाये थे। अब कांग्रेस ने सीधे अखिलेश को निशाने पर लेकर इरादे साफ कर दिये हैं।

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