वाराणसी। सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद किसी और के तो नहीं लेकिन छुट्टा घूमने वाले मवेशयों के ‘अच्छे दिन’ आ गये थे। इनकी तरफ टेढ़ी नजर की किसी की हिम्मत नहीं होती। वीवीआईपी के आगमन पर इन्हें पकड़ कर देहात में छोड़ दिया जाता था। किसानों की फसल यह चट कर जाते और शिकायत सुनने वाला कोई नहीं था। पानी सिर से गुजरता देख जिला प्रशासन ने इनकी सुध ली। सीडीओ सुनील कुमार वर्मा के मुताबिक निराश्रित पशुओं तथा गायों को आश्रय देने के उद्देश्य से चरागाहों का विकास किया जा रहा है। इन चरागाहों को इनकम जनरेशन से भी जोड़ा जाएगा ताकि इस पूरे मॉडल को सतत रूप से संचालन किया जा सके। इसकी खातिर बड़ागांव ब्लॉक के खरावन ग्राम सभा तथा खरावन चक ग्राम सभा भूमि के अलावा पिंडरा ब्लॉक के देवजी ग्राम सभा में भी भूमिका चयन किया गया है। इनके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी खोजने का कार्य जारी है ’

गोबर व गोमूत्र से होगी कमाई

इन चरागाहों को ‘नंद उपवन’ के तौर पर विकसित करने हेतु ‘भारतीय हरित खादी ग्रामोद्योग संस्थान’ के साथ भी वार्ता की गई है। यह संस्थान (एनजीओ) इन चरागाहों से आय सृजित करने हेतु यहां पर गोमूत्र से अमीनो एसिड बनाने की प्लांट तथा गोबर से बायो कंपोस्ट तथा बायोफ्यूल बनाने के प्लांट लगाकर इन सभी उत्पादों की बिक्री सुनिश्चित करेगा। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो निराश्रित पशुओं के साथ साथ अन्य गांव के पशुओं का भी गोबर तथा गोमूत्र खरीद कर आय का सृजन किया जाएगा। इन चरागाहों के विकास का कार्य नरेगा से तथा 14वें वित्त के फंड से करने के अलावा इसमें एनजीओ तथा अन्य संभ्रांत व्यक्तियों का भी सहयोग लिया जाएगा।

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