लखनऊ। प्रदेश की दो लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर है। एक सीट खुद सीएम योगी की रही है जबकि दूसरी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या की। दोनों ही सीटों पर गिरे पोलिंग प्रतिशत ने भाजपा की बेचैनी बढ़ा दी है। दबी जुबान से पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि गोरखपुर में तो नैय्या पार लग जायेगी लेकिन फूलपुर में ढटका भी लग सकता है। वजह, जो इलाके भाजपा का गढ़ माने जाते थे वहां से इस दफा वोटर कम संख्या में निकले जबकि जहां से खतरा समझा जा रहा था वहां वोटरों की कतार शाम तक लगी रही। ले दे कर अब मत विभाजन पर ही उम्मीद टिकी है। फिलहाल सबकी निगाहें 14 मार्च को होने वाले मतगणना पर टिकी है।

फूलपूर के शहरी मतदाता उदासीन

प्रचंड बहुमत से सत्ता संंभालने के बावजूद भाजपा को शहरी पार्टी माना जाता है। बावजूद इसके फूलपुर के शहरी वोटर मतदान को लेकर उदासीन रहे। पांचों विधानसभा सीटों पर शाम 5 बजे तक महज 38 फीसदी वोटिंग हुई। इसमें फाफामऊ में 43 प्रतिशत, सोरांव में 45 प्रतिशत, फूलपूर में 46.32 प्रतिशत जबकि शहर उत्तरी में 21.65 प्रतिशत और शहर पश्चिमी में 31 प्रतिशत वोटिंग हुई। आंकड़ों के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले 14 फीसदी कम मतदान हुआ। पिछले लोकसभा चुनाव में 52.20 प्रतिशत मतदान हुआ था, जिसमें बीजेपी के केशव मौर्या को विजय मिली थी।

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