गोरखपुर। पढ़े लिखे मगर बेरोजगार अरूण कुमार इन दिनों चर्चा में हैं। गोरखपुर की सियासत में इनके किस्से चटखारे के साथ सुनाई पड़ रहे हैं। चौक-चौराहे से लेकर गली मुहल्ले तक अरूण लोगों की जुबान पर छाए हुए हैं। अरूण उन लोगों में से हैं जो विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं। लेकिन अरूण की पहचान दूसरों से जरा अलग है। ये दूसरे प्रत्याशियों की तरह खुद को पाक साफ नहीं बताते बल्कि भ्रष्ट उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर चुके हैं।

क्या है अरूण कुमार का तर्क ?

चुनावी रण को जीतने के लिए अरूण कुमार हर संभव कोशिश कर रहे हैं। शहर की सड़कों के खाक छान रहे हैं। पच्चे बांटकर अपनी उम्मीदवार का ऐलान कर रहे हैं। फर्टिलाईजर निवासी अरूण कुमार ने भ्रष्ट होने का इल्जाम खुद उन्होंने लगाया है। खुद को ‘भ्रष्ट बताने के पीछे सोच क्या है?  इस पर उनका तर्क है चुनाव में उतरने वाला हर उम्मीदवार खुद को पाक-साफ और ईमानदार साबित करने की बात करता है। जनता सब की असलियत जानती इसीलिए वह ईमानदारी का ढिंढोरा पीटने को जगह खुद को भ्रष्ट घोषित करके चुनाव लड़ेंगे, क्या पता जनता असल बेईमानो को ढूंढ़ कर सबक सिखाए और उनकी किस्मत चमक जाए।

क्यों राजनीति में कूदे अरूण कुमार ?

अरूण कुमार पढ़ाई लिखायी के बाद नौकरी ढूंढ़ने मे भी असफल रहे। अब वह सियासत मे दांव आजमाना चाहते हैं लेकिन इस नये चोले के साथ देखना है धन-बल की इस  लड़ाई मे उनका क्या हश्र होता है लेकिन अरूण कुमार भ्रष्ट और बेईमान पर एक नायाब तरीके से चोट तो कर ही दी है।

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