संजय द्विवेदी
सोनभद्र। यूपी विधानसभा चुनाव में सूबे की ज्यादातर सीटों की तरह यहां भी ‘बाहरी और बागियों’ का माहौल बना हुआ है। भाजपा और बसपा ने चुनाव के वक्त पार्टी में शामिल हुए उम्मीदवारों पर दांव खेला है तो सपा ने अपने पुरान सिपाही को एक बार फिर मैदान में उतारा है। चूंकि, इस चुनाव में सपा से कांग्रेस का गठबंधन है, ऐसे में सपा प्रत्याशी पहले से अधिक प्रभावी दिख रहे हैं। जबकि बसपा छोड़कर भाजपा में आए प्रत्याशी को पार्टी के लोग ही पसंद नहीं कर रहे। पुराने लोगों को दरकिनार किये जाने से उन्होंने पड़ोसी सीट पर अपनी ताकत लगा दी है। वहीं, सपा से रुखसत होकर बसपा में आयीं बीना सिंह पार्टी कैडर के बलबूते मैदान में अपनी उपस्थिति बनाए हुई हैं। यहां के मतदाताओं का यह नारा “राबर्ट्सगंज में भूपेश, घोरावल में रमेश, मड़िहान में ललितेश और यूपी में अखिलेश’ क्षेत्र में चर्चा बना हुआ है।

विकास कार्यों की अनदेखी भारी पड़ी अनिल मौर्या पर
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में राजगढ़ विधानसभा से अलग होकर घोरावल विधानसभा बना था। 2012 में राजगढ़ विधानसभा से बसपा के दो बार के विधायक रहे अनिल मौर्या और सपा से रमेश चंद्र दुबे में कांटे की टक्कर थी। तो वहीं बीजेपी ने समझौते के तौर पर हल्का प्रत्याशी विजेंद्र पटेल को मैदान में उतारा था। कांग्रेस ने अरुण कुमार सिंह को प्रत्याशी बनाया था। अनिल मौर्या का विरोध इस बात को लेकर था कि उन्होंने विगत दो पंचवर्षीय योजनाओं में विकास के नाम पर कोई विशेष कार्य नहीं किया, जिसका फायदा रमेश दुबे को मिला और घोरावल विधानसभा का चुनाव अनिल बनाम रमेश हो गया। रमेशचंद्र दुबे सपा को 86708 वोट मिला था और अनिल मौर्या बसपा को 72521 से संतोष करना पड़ा था। वर्तमान 2017 के चुनाव की स्थिति बिल्कुल ही विपरीत है। इस बार सपा, बसपा और बीजेपी में कांटे के टक्कर है। निर्दल प्रत्यासी के रूप में जय प्रकाश पांडेय उर्फ चेखुर पांडेय के आने की संभावनाओं ने पूरे घोरावल विधानसभा में हलचल पैदा कर दी है।

‘असंतुष्ट’ हैं पार्टियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती
घोरावल में इस बार की स्थिति बिलकुल विपरीत है। बसपा छोड़कर बीजेपी में आये अनिल मौर्या का पार्टी में ही विरोध है। जमीनी नेताओं की उपेक्षा कर बाहरी व्यक्ति को टिकट मिल गया। जो नेता वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहे थे, उनको पार्टी ने ठेंगा दिखा दिया। यही कारण है कि घोरावल विधासभा से बीजेपी का टिकट मांगने वाले असंतुष्ट नेता अब राबर्ट्सगंज विधानसभा में पार्टी के लिए जी जान से लगे हुए हैं। बसपा की पॉलिसी से बिल्कुल विपरीत नयी पार्टी में आये अनिल मौर्या के सामने वोटरों के पास जाकर वोट मांगने का कोई ठोस कारण इसलिए नहीं है कि विगत दस वर्षों में विकास के नाम पर बताने के लिए उनके पास कुछ नहीं है। वहीं सपा के रमेश चंद्र दुबे के पास गिनाने के लिए कई कार्य हैं, पर पार्टी में मचे घमासान के बाद मतदाताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुयी है। लेकिन कांग्रेस का साथ पाकर सपा पार्टी अपने आप को मजबूत स्थिति में देख रही है और चुनाव में जीत का दावा कर रही है।

निर्दल प्रत्याशी की ‘धमक’ 
दोनों पार्टियों से अलग बसपा प्रत्याशी बीना सिंह भी मैदान में है। सपा छोड़कर बसपा में आयी बीना सिंह के पास भी चुनौतियां बड़ी हैं, क्योंकि सामने मैदान में दोनों नेता विधायक रह चुके हैं और विकास कार्यों के दावे कर रहे है। बसपा प्रत्याशी या समर्थकों की बात करे तो उनके पास पार्टी का कैडर वोट है, जरूरत मेहनत करने की है। हालांकि, बीना सिंह का यह पहला चुनाव है लेकिन पूर्व के आंकड़ों पर नजर डाले तो उन्हें कैडर वोट और महिला होने का फायदा मिल सकता है। इस त्रिकोणीय लड़ाई में अगर निर्दल के रूप में जय प्रकाश पांडेय मैदान में आते हैं तो पूरा समीकरण बिगड़ सकता है और जीत के दावा कर रहीं पार्टियों को काफी नुकसान हो सकता है।

कुर्मी, ब्राह्मण, कोल और मुस्लिम मत होंगे निर्णायक  
सभी पार्टियां अपनी पार्टी के परंपरागत मतदाताओं के अलावा अन्य मतदाताओं में सेंध लगाने में जुटी हैं और तरह तरह के प्रलोभनों के साथ प्रचार प्रसार कर रही हैं। कोई मोबाइल फोन और कुकर की बात कर रहा है तो कोई मुफ्त में गैस सिलिंडर, आवास और शौचालय उपलब्ध कराने के दावे। लेकिन जनता इन खोखले दावों से आजिज आ चुकी है। घोरावल विधानसभा में इस बार निर्णायक वोटर ब्राह्मण, पटेल, कोल और मुस्लिम रहेंगे, जिसपर सभी पार्टियों की नजर है। मतदाताओं की बात करें तो घोरावल विधानसभा में कुल मतदाता 365269 हैं, जिनमें 196765 पुरुष, 168495 महिला तथा 9 अन्य की श्रेणी के मतदाता हैं। जातिगत आधार पर मतदातों का प्रतिशत देखा जाय तो अनुमानत: मौर्य लगभग 16 फीसदी , ब्राह्मण 13 , यादव 6, पटेल 11, अनुसूचित जाति 13, वैश्य 9, बियार, बिंद, चौहान 7, क्षेत्रीय 4.5, कन्नौजिया 3.5, मुसलमान 6.5, कोल 5, बैसवार 3 और इनके अलावा 2.5 फीसदी में अन्य हैं ।

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