जर्मन प्रेसिडेंट ने भगवान बुद्ध का किया दर्शन, देश की शांति के लिए मांगी दुआ

वाराणसी। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल माक्रों के बाद बनारस एक और राष्ट्राध्यक्ष की मेहमानवाजी में मशगूल है। ये हैं जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वॉल्टर स्टाइनमायर। अपने एक दिवसीय दौरे पर गुरुवार को दोपहर में फ्रैंक वॉल्टर वाराणसी पहुंचें हैं। काशी की धरती पर कदम रखते ही फ्रैंक एयरपोर्ट से सीधे भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ पहुंचे। यहां उन्होंने यहां संग्राहलय में भगवान बुद्ध के अस्थि कलश का दर्शन कर नमन किया। लगभग 20 मिनट तक जर्मन राष्ट्रपति ने म्यूजिम में बौद्ध कलाकृति से जुडी कलाओं को निहारा। सारनाथ म्यूजियम में भगवान बुद्ध और बोधिसत्व की मूर्तियों के रूप में बौद्ध शिल्प का समृद्ध खजाने को राष्ट्रपति स्टाइन मायर देखकर अविभूत हो गए।

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अपने देश के लिए मांगी दुआ

जर्मनी के राष्ट्रपति ने महात्मा बुद्ध की प्रतिमा के आगे मोमबत्ती जलाई। वो यहां की बनावट और खूबसूरती देख अभिभूत हुए। बारी बारी से वहां रखे अभिलेखों के पास गए और उसकी जानकारी ली।मंदिर के कर्ताधर्ता और महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया, वाराणसी केसेक्रेटरी मेदांकर भंते (पुजारी) ने बताया कि जर्मन राष्‍ट्रपति ने भगवान बुद्ध की अस्‍थियों के दर्शन किये हैं। उन्‍होंने बताया कि जर्मन राष्‍ट्रपति फ्रैंक वाल्‍टर स्‍टाइन मायर ने खुद वहां मौजूद लोगों से कहा कि उन्‍होंने अपने देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए भगवान बुद्ध सेआशीर्वाद मांगा है। फ्रांस के राष्ट्रपति के दौरे एक महीने के भीतर ही काशी में दुनिया के दूसरे ताकतवर देश जर्मनी के राष्ट्राध्यक्ष का आगमन हुआ है। महज दस दिनों के अंदर दूसरे राष्ट्राध्यक्ष के आगमन को लेकर काशीवासियों में भारी उत्साह है।

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स्वागत के लिए सड़कों पर उतरे लोग 

सारनाथ में करीब सवा घंटे तक म्यूजियम और धमेख स्तूप का अवलोकन करने के बाद लंच के नदेसर स्थित होटल गेट वे पहुंचे। इसके पहले उनके आगमन को लेकर पूरे शहर में उत्साह देखा गया। एयरपोर्ट से लेकर सारनाथ तक जगह-जगह लोगों ने जर्मन राष्ट्रपति का स्वागत किया। सड़कों उत्सव सा नजारा देखने को मिलाष स्कूली बच्चे सहित अन्य लोग सड़कों पर भारत और फ्रांस का झंडा लेकर जर्मन राष्ट्रपति के स्वागत के लिए उमड़े।

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