वाराणसी। रहने वाले वह सात समुंदर पार के हैं लेकिन भारतीय बच्चों के लिए तीन साल पहले उन्होंने एक स्कूल की स्थापना की। इसके बाद शिक्षा की खातिर लोगों को जागरूक करने की खातिर विश्व भ्रमण का कार्यक्रम बनाया। वह भी किसी दूसरे साथन से नहीं बल्कि साइकिल से। जर्मनी के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान के शिक्षक दंपत्ति (इमके फ्रÞोडेरमान एवं राल्फ लांग) काशी पहुंचे तो उनकी ख्याति पहले ही पहुंच चुकी थी। बुधवार को यश भारती सम्मानित सरोद वादक पंडित विकास महाराज जी के कबीर चौरा स्थित आवास पर जर्मन दम्पति ने अपने अनुभव मीडिया से साझा किये।

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हिमालय की चोटियां पार की साइकिल से

जर्मन दम्पति ने 2014 में भारतीय बच्चों के लिए राजस्थान में एक स्कूल की स्थापना की, जिसे उनके स्कूल के बच्चों द्वारा वित्तपोषित किया जाता रहा है। अगस्त 2016 में जर्मन दंपत्ति ने शिक्षा के प्रति विश्व जागरूकता के तहत साइकिल से अमेरिका से भारत की यात्रा करने निर्णय किया। इन्होने अमेरिका के पथरीले पर्वतों को पार करने के उपरांत नार्थ अफ्रीका, आॅस्ट्रिया,इटली,ग्रीस,अर्मेनिआ, जॉर्जिया, ईरान, उज्बेकिस्तान, तडजहीकिस्तान, किर्गिजस्तान, कजाकिस्तान एवं चीन के रास्ते कठिन हिमालय पर्वत को पार कर सकुशल भारत पहुंचे। यात्रा के आरम्भ में जर्मन सरकार ने इस जर्मन दंपत्ति को शांति एवं शिक्षा के राजदूत के तौर पर सम्मानित किया एवं यात्रा सकुशल पूरी करने हेतु हर उस देश को इन्हे सहयोग देने का अनुरोध किया, जो विश्व शिक्षा को अपना सहयोग प्रदान करते हैं। नववर्ष के पहले दिन काशी पहुंचे जर्मन दंपति ने मानवाधिकार जन निगरानी समिति (पीवीसीएचआर) के आफिस में डा. लेनिन रघुवंशी, श्रुति नागवंशी समेत दूसरे लोगों से मुलाकात की।

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