सुजीत सिंह प्रिंस

गाजीपुर। शिक्षा विभाग की माया भी अजब है। कभी मिड-डे-मील तो कभी अध्यापकों की लापरवाही। हर ओर भ्रष्टाचार का आलम पसरा है। शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ों ने इस कदर पांव जमा लिया है, जिसे तोड़ पाना अब टेढ़ी खीर हो चुका है। गाजीपुर के बीएसए दफ्तर में एक ऐसे ही खेल का पर्दाफाश हुआ है जिसे सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे। यूं तो इस दफ्तर के जिम्मे बच्चों का भविष्य सुधारने का जिम्मा है लेकिन विभाग के आलाधिकारियों ने बच्चों को ही कमाई का जरिया बना लिया है। दरअसल विभाग में महिला अध्यापकों को बाल्यकाल अवकाश देने के नाम पर वसूली का खेल शुरू कर दिया है। बताया मोटी रकम वसूलकर महिला अध्यापकों को अपने बच्चों की परवरिश के लिए छुट्टी दी जाती है।

महिला अध्यापकों से होती है मोटी वसूली

नाम ना छापने की शर्त पर कुछ महिला अध्यापकों ने अमृत प्रभात डॉट कॉम से बातचीत में बताया कि बाल्याकाल अवकाश देने के एवज में उनसे 25-30 हजार रुपए की डिमांड की जाती है। मांग पूरी ना होने पर छुट्टी में कटौती कर दी जाती है। पैसे देने वाली महिला अध्यापकों को 90 दिन का अवकाश तो मिल जाता है, लेकिन ये रकम नहीं दे पाता उसे सिर्फ 15-20 दिन का ही अवकाश मिलता है। यही नहीं उससे तरह-तरह के सवाल किए जाते हैं। कुछ महिला अध्यापकों ने इस बात की शिकायत मुख्यमंत्री से भी है।

बाबुओं की मनमानी से महिला अध्यापक परेशान

सूत्रों के मुताबिक वसूली का ये पूरा खेल जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्रवण कुमार गुप्ता की नाक के नीचे होता है। इस खेल में दफ्तर के कुछ बाबुओं का हाथ है। बीएसए का चहेता एक बाबू ही पूरे खेल को अंजाम देता है। उसका दबदबा इस कदर है कि किसी अध्यापक की इतनी हिम्मत नहीं है कि उसकी शिकायत ऊपर कर सके। इस बाबत सवाल पूछने पर बीएसए श्रवण कुमार गुप्ता गोलमोल जबाव देते रहे। उन्होंने कहा कि इस तरह की शिकायत उनके संज्ञान में नहीं है। अगर किसी तरह की शिकायत उनके पास आती है, जांच जरुर होगी।

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