वाराणसी। लड़की से रेप के मामले में सलाखों के पीछे पहुंचे यूपी के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति का विवादों से पुराना नाता रहा है। अखिलेश सरकार के लिए गायत्री प्रजापति हमेशा ही सिरदर्द बने रहे। खनन जैसे मलाईदार विभाग के मंत्री रहने के दौरान गायत्री की संपति में अप्रत्याशित बढोतरी हुई। कुछ साल पहले तक बीपीएल कार्ड धारक गायत्री देखते ही देखते अकूल दौलत के मालिक बन बैठे। प्रदेश के दूसरे जिलों की तरह पूर्वांचल में भी गायत्री का मायाजाल फैला हुआ था। नदियों का सीना चीर कर हर महीने करोड़ों रूपए गायत्री की झोली में डाली जाती थी।

2002 में बीपीएल कार्ड धारक थे गायत्री प्रजापति
अमेठी के रहने वाले गायत्री प्रजापति की गिनती मुलायम सिंह यादव के खास सिपहसलारों में होती है। जानकारों के मुताबिक वो एक ग़रीब परिवार से आते हैं और साल 2002 तक स्थिति ये थी कि वो बीपीएल कार्ड धारक थे यानी ग़रीबी की रेखा से नीचे आते थे। साल 2002 में गायत्री प्रजापतिए ने विधायक का चुनाव लड़ने के लिए जो हलफ़नामा दिया था, उसमें उनकी कुल संपत्तिज महज़ कुछ हज़ार रुपये बताई गई थी। राजनीति में आने से पहले वो ठेकेदारी और प्रॉपर्टी डीलिंग जैसे काम किया करते थे लेकिन धीरे-धीरे वो समाजवादी पार्टी के संपर्क में आए। किन्हीं वजहों से मुलायम परिवार से उनकी नज़दीकी बढ़ी और इसी के चलते उन्हें पार्टी ने इस सीट से विधानसभा का टिकट दे दिया। साल 2012 में उन्होंने सपा के टिकट पर अमेठी से जीत हासिल की। इसके बदले मुलायम ने उन्हें राज्यमंत्री पद का ईनाम दिया। मंत्री बनने के बाद गायत्री प्रजापति ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्हें खनन मंत्री का स्वतंत्र प्रभार मिल गया।

खनन विभाग में चलता था सिंडिकेट
आरोप है कि खनन मंत्री रहने के दौरान गायत्री प्रजापति के दौरान बेहिसाब संपत्ति हासिल की। कहा जाता है कि उनके कार्यकाल के दौरान खनन माफियाओं ने जमकर चांदी काटी। बकायदा इसके पीछे एक सिडिंकेट काम कर रहा था, जिसमे खनन विभाग के कई कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल थे। ये सिंडिकेट एमएम 11 जिसे परमिट भी कहते हैं के प्रति सौ पन्ने के लिए एक लाख चालीस हजार रूपए की वसूली किया करते थे। सूत्रों के अनुसार खनन क्षेत्र से वसूली का ये कारनामा साल 2000 से शुरू हुआ, उस वक्त इन सौ पन्नों की कीमत सिंडिकेट 63 सौ रुपए वसूलते थे। मायावती का शासनकाल आने के बाद इसका रेट बढ़ाकर सीधे पचास हजार रुपए कर दिया गया। गायत्री प्रजापति ने तो पूर्ववर्ती सरकारों को भी पीछे छोड़ दिया और उनका सिंडिकेट एमएम 11 के सौ पन्नों का एक लाख चालीस हजार रुपए वसूलने लगे।

हाईकोर्ट ने भी लगाई थी फटकार
जिस खनन विभाग का ज़िम्मा गायत्री प्रजापति के पास था उसे लेकर अखिलेश सरकार की भी जमकर किरकिरी हुई और हाईकोर्ट तक को उसमें दख़ल देना पड़ा। बाद में हाईकोर्ट ने खनन विभाग में अनिमियताओं को लेकर सीबीआई जांच के आदेश दिए।

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