काशी में अब डराने लगी गंगा, तटवर्ती इलाकों में पलायन शुरू तो राज्य ममंत्री ने किया बाढग्रस्त इलाकों का दौरा

वाराणसी। गंगा नदी का रौद्ररुप जारी है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से बाढ़ के हालत पैदाहो गए हैं। वाराणसी समेत पूरे पूर्वांचल में गंगा खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। तटवर्ती इलाकों के हालात सबसे ज्यादा खराब है। लोग अब सुरक्षित ठिकानों की तलाश में निकल पड़े हैं। प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति एवं प्रोटोकॉल राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) डॉक्टर नीलकंठ तिवारी ने सोमवार को बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र कोनिया एवं आसपास के क्षेत्रों का दौरा कर जायजा लिया तथा कोनिया के एक विद्यालय में स्थापित राहत शिविर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कोनिया के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में किए गए विद्युत कटौती के कारण पेयजल आपूर्ति बाधित होने के दृष्टिगत रखते हुए मंगलवार को प्रभावित घरों में पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित कराए जाने के साथ-साथ पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराए जाने का नगर मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया। उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों ने पीड़ित परिवारों को किसी भी दशा में खाने- पीने की समस्या नहीं होनी चाहिए।

जिला प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

गंगा इस समय उफान पर है और खतरे के निशान के पास बह रही है। ऐसे में जिला प्रशासन ने कमर कस ली है और बाढ़ नियंत्रण कक्ष को एक्टिवेट कर दिया है। जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण, चिकित्सा विभाग, पशु चिकित्सा, राहत एवं बचाव कार्य के प्रभारी, नगर निगम, एनडीआरएफ, ग्रामीण बाढ़ चौकियों और सुरक्षा व्यवस्था का नंबर जारी किया है। इन नंबरों पर कोई भी बाढ़ से दिक्कत में फंसा व्यक्ति सहायता प्राप्त कर सकता है। गंगा के उफान के कारण शहर के तटवर्ती इलाकों में लोग अपने घरों से सुरक्षित स्थानों के लिए कुछ कर रहे हैं, जहां अभी प्रशासन नहीं पहुँच पाया है वहां लोग अपने इंतजाम से घरों से बाहर जा रहे हैं। गंगा के साथ ही साथ वरुणा के तटवर्ती इलाकों में स्थिति बदतर है।

वरुणा नदी भी उफान पर

सिर्फ गंगा ही नहीं उसकी सहायक नदियां भी पूरे उफान पर है। वरुणा नदी में बढ़े हुए जलस्तर से आस पास के लोगों की नींद उड़ गई है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, लिहाजा आसपास का पूरा इलाका जलमग्न हो गया है। तटवर्ती इलाकों में लोगों की छतों तक पानीपहुंच गया है। लोग अब सुरक्षित इलाकों की ओर पलायन कर रहे हैं। सबसे ज्यादा खराब हालात कोनिया, नक्खीघाट, शिवपुर, चौकाघाट में खराब है।

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