गंगा दशहरा पर दशाश्वमेध घाट पर रात तक कई आयोजन, जानिये अवतरण की कथा

वाराणसी। काशी के प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर गंगोत्री सेवा समिति द्वारा बुधवार को गंगा दशहरा पर 11 ब्राह्मणो द्वारा गंगा की महाआरती और सनातनी परम्परा से गंगा पूजन के साथ ही मां गंगा का 51 लीटर दूध से दुग्धाभिषेक किया जाएगा। इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन की शुरूआत सायंकाल सात बजे से किया जाना है। धार्मिक अनुष्ठान का श्रीगणेश मंगलाचरण के पश्चात समिति के संस्थापक अध्यक्ष किशोरी रमण दूबे (बाबू महाराज) के सान्निध्य में मां गंगा की शास्त्रोक्त विधि से 51 लीटर दूध से अभिषेक होगा। इस अवसर पर सिंहासनारूढ़ गंगा महारानी की अलौकिक श्रृंगार दर्शन संग गंगा के लहरों पर बने मंच से सुप्रसिद्ध गायक कलाकारों द्वारा भजनों की प्रस्तुति होगी। आयोजन में मुख्य अतिथि अजय व्यास (कार्यकारी निदेशक) यूको बैंक कोलकता, अध्यक्षता प्रो राजाराम शुक्ला कुलपति सम्पूर्णानद संस्कृत विश्वविद्यालय और सम्मानित अतिथि डॉ दया शंकर मिश्र (राज्य मंत्री उपाध्यक्ष पूर्वांचल विकास बोर्ड ) होंगे। भजन रसधार में विजय शंकर वशिष्ट ,अमलेश शुक्ला सहित अन्य गायक कलाकार कन्हैया दुबे के संयोजन में भजनों की प्रस्तुति करेगें।

गंगा अवतरण कथा

धार्मिक ग्रंथों एवं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गंगा देवी है जिनका जन्म हिमालय के घर हुआ था। मान्यताओं के अनुसार महर्षि कपिल मुनि के श्राप से भस्म हुए सूर्यवंशी राजा सागर के 60 हजार पुत्रों की मुक्ति के लिए उनके वंशज भागीरथ ने कठोर तपस्या की थी। भगवान ब्रह्मा ने भागीरथ की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर मोक्ष दायिनी पतित पावनी गंगा मैया को अपने कमंडल से धरती पर भेजने के लिए हां कर दी। इस निर्णय को सुन समूचे देवलोक में हाहाकार मच गई। देवताओं को यह आशंका सताने लगी कि अगर गंगा सीधे स्वर्ग से धरती पर आई तो भारी तबाही मच जाएगी। यह सुनते ही भागीरथ ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या प्रारंभ की,क्योंकि भगवान शिव ही केवल गंगा के वेग को संभाल सकते थे। भागीरथी की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने गंगा की जलधारा को अपनी जटाओं में लेने के लिए हां कर दी। वैशाख शुक्ल सप्तमी को गंगा मैय्या स्वर्ग से उतर कर भगवान शिव की जटाओं में आ गई। जिसके बाद भगवान शिव ने अपनी एक जटा के सहारे गंगा पृथ्वी पर आई। यह दिन गंगा दशहरा का था।

यह मिलता है फल

पौराणिक मान्यता मुताबिक ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मां गंगा का अवतरण दिवस है। वह आज ही के दिन भगवान भोले की जटाओ से मुक्त होकर पृथ्वी में जन कल्याणार्थ प्रकटी इस कारण आज के गंगा स्नान का विशेष महत्व है। ब्रम्ह पुराण के अनुसार गंगा दशहरा के अवसर पर गंगा में 10 डुबकियां लगाने से मनुष्य के मनसा, वाचा और कर्मना द्वारा जाने या अनजाने किये हुए दस पाप का धुल जाते हैं तो ‘वही दरसु परशु करी मज्जन पाना/हरहि पाप कह वेद पुराना’। रामचरित मानस में लिखे इस दोहे के अनुसार आज के दिन गंगा में मज्जन पान करने मात्र से सभी इछित कार्य पूरे होते है। ये भी मान्यता है कि दशाश्वमेध घाट पर स्नान-दान का विशेष फल प्राप्ति का विधान है।

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