वाराणसी। जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर को उनकी कुर्सी से बेदखल करने की खातिर भाजपा के दो विधायकों ने खुले तौर पर मोर्चा खोल रखा है। पार्टी भी उनके साथ दिख रही है और सूत्रों की मानें तो एक मंत्री भी अपनी तरफ से मोर्चा संभाले हैं। बावजूद इसके प्रस्ताव पास होने की राह आसान नहीं दिख रही है। वजह, प्रदेश में महागठबंधन को लेकर भले कयास लगाये जा रहे हो लेकिन अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दे पर सपा-बसपा के अलावा दूसरे दल साथ दिख रहे। एक खेमा सदस्यों को बाहर भेज कर अपने खेमे में रखने की कोशिशों में जुटा है तो अध्यक्ष को विश्वास हैं कि लोग विकास को लेकर उनके साथ हैं। दलगत भावना से उठ कर वोटिंग होगी और विरोधियों को मुंह की खानी पड़ेगी।

कपसेठी हाउस फिर से सत्ता का बनेगा केन्द्र
सूबे में किसी की सरकार रही हो लेकिन पिछले दो दशक से अधिक समय से कपसेठी हाउस ही जिला पंंचायत को संचालित करता रहा है। इसके पहले भी जो अविश्वास प्रस्ताव आये उसे लाने से लेकर पास कराने में कपसेठी हाउस की भूमिका रही। इस बार भी सैयदराजा के भाजपा विधायक सुशील सिंह के संग पिण्डरा के विधायक अवधेश सिंह खुल कर सामने हैं। उनका आरोप है कि विकास कार्य नहीं हो रहा है जिससे आम सदस्य चाहते हैैं कि किसी दूसरे को अध्यक्ष चुना जाये। प्रस्ताव पर 15 जुलाई को ही वोटिंग होनी थी लेकिन बाद में इसे 28 कर दिया गया। सपा का आरोप है कि सत्ताधारी दल को पता चल गया था कि प्रस्ताव पास नहीं होगा इसलिये यह हथकंडा अपनाया गया।

अपरजिता को विश्वास, विकास के नाम पर सभी साथ
जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर का कहना है कि पिछले एक साल में हर सदस्यों के क्षेत्र में जितना काम हुआ है उतना पांच सालों में नहीं हुआ था। पहले कुछ खास क्षेत्रों तक विकास सीमित था लेकिन दलगत भावना से ऊपर उठ कर सभी के इलाकों में पांच से लेकर दस तक काम कराये गए हैं। अब वह जमाना नहीं रह गया कि किसी को कुछ दिनों के लिए कहीं ले जाकर अपने पक्ष में वोट करा लिया जाये। आम सदस्य उनके साथ है और यह वोटिंंग में सााबित हो जायेगा। सभी सदस्यों से उन्होंने अनुरोध किया है कि काम के आधार पर मूल्यांकन करे। जिला पंचायत किसी की मिल्कियत नहीं हैै। इसे लेकर पार्टी पूरी तरह से एक है और सभी अपनी तरफ से प्रयास कर रहे हैं कि अविश्वास प्रस्ताव पास न हो।

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