भाजपा की सूची से बाहुबलियों से लेकर तमाम लोगों को मिल गया साफ संदेश, बिन मांगे मोती मिले मांगे मिले न …

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को जो सूची जारी की है उसमें महज सात नाम है। बावजूद इसमें जो संदेश था उसका आशय साफ था। भाजपा ने जहां बाहुबलियों को साफ कर दिया कि पार्टी में सहयोगियों वाले ‘बैकडोर’ से भी इंट्री संभव नहीं है वहीं भरोसा कायम रखने वाले सहयोगियों को इनाम के तौर पर एक्ट्रा सीट प्रदान कर दी है। बालीवुड के सुपरस्टार रविकिशन को गोरखपुर के चुनावी मैदान में उतारते हुए स््पष्ट करने की कोशिश की गयी है कि भले बालीवुड के चंद कलाकारों को कोई पार्टी अपने पाले में खींच ले लेकिन भोजपुरी इंड्रस्टी पर तो एकाधिकार कमल का ही रहेगा।

बाहुबली के आगे निषाद प्रत्याशी

जौनपुर के बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने पिछला विधानसभा चुनाव निषाद पार्टी के टिकट पर लड़ा था। इस दफा भी वह एनडीए के किसी घटक दल का हिस्सा बनने की खातिर खासे प्रयासरत थे लेकिन पार्टी ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए जौनपुर से सांसद केपी सिंह को फिर से मैदान में उतार दिया। एक दिन पहले गठबंधन ने इस सीट पर रिटायर्ड पीसीएस को प्रत्याशी बनाया था। इसी तरह भदोही सीट से निषाद पार्टी के इकलौते विधायक बाहुबली विजय मिश्र के आने के पूरे आसार थे लेकिन बसपा से आने वाले रमेश बिंद को टिकट मिल गया। निषाद पार्टी के संस्थापक और गोरखपुर के सांसद रहे प्रवीण निषाद को संत कबीरनगर के मैदान में पूर्वांचल के चर्चित बाहुबली हरिशंकर तिवारी के पुत्र भीष्मशंकर उर्फ कुशल तिवारी के सामने उतारा गया है।

जूताकांड और चौंकाने वाला नाम

संतकबीर नगर के मौजूदा सांसद शरद त्रिपाठी जूताकांड को लेकर विवादों में घिरे थे लिहाजा उनका टिकट कट गया है। अलबत्ता उनके पिता उनके पिता रमापति त्रिपाठी को देवरिया लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है। चौंकाने वाला प्रतापगढ़ से संगम लाल गुप्ता का रहा। अपना दल को घोषित तौर पर भाजपा ने दो सीटें दी है लेकिन प्रतापगढ़ से संगमलाल गुप्ता को उतारना बिन मांगे मोती सरीखा रहा। सूची में एक और नाम अंबेडकरनगर से मुकुट बिहारी का रहा है जिन्हें भी टिकट दिया है।

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