वाराणसी। दशकों तक आतंक का पर्याय रहे माफिया डॉन प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी पिछले एक दशक से देश और प्रदेश की विभिन्न जेलों में था। बावजूद उसके उसका ‘कारोबार’ बदस्तूर चल रहा था। बजरंगी के नाम का इतना खौफ था कि सुनने के बाद लोग लाखों की रकम पहुंचा देते थे। इसके अलावा रियल स्टेट के क्षेत्र में पत्नी सीमा सिंह के नाम से कंपनी थी तो बालू से लेकर शराब के ठेके भी अलग-अलग नामों से चलते रहे। बागपत जेल में सोमवार की अल सुबह बजरंगी की हत्या के बाद गिरोह के सामने सबसे बड़ा संकट यह कि अब किसके नाम पर धंधा चलेगा? दरअसल बजरंगी के कुछ ‘मैैनेजर’ सिर्फ नाम पर करोड़ों की उगाही कर रहे थे। विवादित जमीन से लेकर दूसरे मामलों में नाम को कैश करने वाले मंगलवार को घर से शवयात्रा निकलने के पहले से लेकर मणिकर्णिका घाट तक यही मंथन करते रहे कि अब किसके ‘नाम’ पर उगाही की जायेगी।

पता भी नहीं चलता और उतर जाते थे थे लाखों

जौनपुर में पिछले दिनों अस्पताल संचालक से बजरंगी के नाम पर 50 लाख की वसूली की गयी थी। भुक्तभोगी इतना घबरा गया था कि उसने पुलिस से शिकायत नहीं की। पुलिस ने इस मामले में दो को गिरफ्तार कर लगभग नौ लाख रुपये बरामद किये तो उसने 15 लाख वसूलने की रिपोर्ट लिखायी। बाद में 35 लाख और बरामद होने पर कबूल किया कि कुछ 50 लाख दे चुका था। इसी तरह शहर की एक विवादित जमीन की पंचायत के नाम पर तीन करोड़ रूपये ले लिये गये थे। इसमें बजरंगी की संलिप्तता रही हो या नहीं लेकिन मैनेजर कैश कलेक्शन कर चुके हैं।

फिलहाल पत्नी का नाम आया सामने

अपराध जगत में भले बजरंगी के उत्तराधिकारी के रूप में कई नामों की चर्चा चल रही हो लेकिन परिवार ने स्पष्ट कर दिया है कि कानूनी लड़ाई व कारोबार से लेकर राजनैतिक मोर्चे पर भी कमान पत्नी सीमा सिंह के हाथ में रहेगी। करीबियों का दावा है कि बजरंगी का कारोबार सौ करोड़ से अधिक का हो सकता है। बेटा अभी छोटा है और दूसरे किसी के बदले सीमा सिंह को सभी मामलों की पहले से जानकारी है। लिहाजा उनके अलावा किसी दूसरे को यह जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। इससे समस्या सिर्फ ‘मैनेजरों’ को है क्योंकि सीमा के नाम पर उगाही नहीं हो पायेगी।

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