वाराणसी। यूूं तो बहुुचर्चित सिकरौरा कांड में एमएलसी बृजेश सिंह का पक्ष रखने के लिए स्थानीय अधिवक्ताओं की फौज थी। फौजदारी के पुराने धुरंधरों से लेकर मेरिट के बचे खुचे अधिवक्ता बचाव पक्ष की तरफ थे। बावजूद इसके तुुरूप के इक्के के रूप में मुंबई हाईकोर्ट के जानेमाने अधिवक्ता सुदीप पासबोला को बुुलाया गया था। वादिनी हीरावती से जिरह समेत अहम मौकों पर वरिष्ठ अधिवक्ता पासबोला मुंबई से आते थे। सूत्रों की माने तो मुंबई के चर्चित जेजे हत्याकांड में भी पासबोला ने बृजेश और उनके लेफ्टीनेंट त्रिभुवन सिंह की तरफ से पैरवी की थी जिससे वह बाइज्जत बरी होने में ससफल रहे।

कसाब को कर दिया था इनकार

सुुदीप पासबोला मुंबई हाइकोर्ट के चर्चित अधिवक्ता माने जाते हैं। उनकी ख्याति को देखते हुए पुर्तगाल से प्रत्यार्पण के लाये गये अबू सलेम ने अपना अधिवक्ता रखा था। सम्भवत: यही कारण था कि मुंबई पर आतंकी हमले के मामले में पकड़े गये पाकिस्तानी आतंकी कसाब ने उन्हें अधिवक्ता रखने की इच्छा जतायी थी। बताया जाता है कि सुदीप पासबोला ने उसका मामला लेने से साफ इनकार कर दिया था।

फेल हुआ अभियोजन का अंतिम दांव

दोनों पक्षों की तरफ से बहस पूरी होने के बाद अभियोजन की तरफ से जमानत के बाद लंबे समय तक की फरारी के संग आपराधिक इतिहास का वास्ता दिया गया था। बचाव पक्ष की तरफ से इस मामले में बागपत जेल में मारे गये माफिया डॉन प्रेमप्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी के मामले की नजीर दी गयी थी। हाईकोर्ट ने इस मामले का निस्तारण करते हुए आदेश में कहा था कि फरारी और आपरााधिक इतिहास सजा का आधार नहीं हो सकता।

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