वाराणसी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जे पी यादव की अदालत ने बैंककर्मी महेश जायसवाल हत्या के मामले में चंदौली के पूर्व सपा सांसद जवाहर जायसवाल और उसके बेटे गौरव जायसवाल को सीआरपीसी की धारा 82 ( फरार घोषित) के तहत कार्रवाई की है। इतना ही नहीं कोर्ट ने फरार घोषित करने के आदेश को सार्वजनिक स्थानों पर चिपकवाने का भी कैंट पुलिस को आदेश दिया है। पिता-पुत्र के स्थायी और अस्थायी आवासों के संग रेलवे और बस स्टेशन के अलावा कचहरी-कलेक्ट्रेट सरीखे सार्वजनिक स्थानों पर इस इन पोस्टरों को लगाने का आदेश दिया गया है। साथ ही राष्ट्रीय समाचार पत्रों में फरारी की सूचना को प्रकाशित करने को भी कहा गया है।

सपा सरकार के समय दबा था मामला

गौरतलब है कि कि 23 अप्रैल 2012 को अर्दली बाजार क्षेत्र में बदमाशो ने बैंककर्मी महेश जायसवाल को गोली मार हत्या कर दी थी। इस मामले में रोहित उर्फ शनि सिंह समेत कई लोगो को आरोपी बना गया था। इस मामले में जवाहर और उसके बेटे के नाम आने विवेचना जारी रखी गयी था। शुक्रवार को कैंट थाना प्रभारी राजीव रंजन उपाध्याय ने जवाहर जायसवाल और उनके बेटे को फरार घोषित करने की अदालत से आज अपील की थी। पुलिस ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि अपने करीबियों के जरिये पिता-पुत्र सम्पति को हटा रहे हैं। गिरफ्तारी पर रोक का हाईकोर्ट से कोई आदेश भी नहीं है। अदालत पहले ही गिरफ्तारी का वारंट जारी कर चुकी थी, लेकिन दोनों लगातार फरार चल रहे हैं।

सत्ता परिवर्तन के बाद बढ़ रही मुश्किले

जवाहर ही नहीं बल्कि परिवार के दूसरे सदस्यों को भी सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। दो दिन पहले आयकर विभाग ने एक अन्य भाई हीरालाल के यहां छापेमारी कर सौ करोड़ की कर चोरी पकड़ी थी। इससे पहले जवाहर के चीनी मिल खरीद के मामले फिर से उभरे थे जिसमें रिकवरी नोटिस लेकर टीम सम्पति कुर्क करने आ धमकी थी। मश्क्कत के बाद एक मामला शांत हो रहा है तो दूसरा उभर जा रहा है।

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