पूर्व एमएलसी विनीत ने दिखाया ‘दम’, जिन सीटों पर लगाया जोर वहां एनडीए की ‘बमबम’

वाराणसी। लोकसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद भले लोग ‘लहर’ और ‘अंडरकरेंट’ सरीखे शब्दों की दुहाई दे रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत यह रही है कि गठबंधन ने जिन नेताओं को तवज्जो नहीं दी वह एक नहीं बल्कि कई सीटों का परिणाम प्रभावित करने का सबब बने। पूर्व एमएलसी श्याम नारायण उर्फ विनीत सिंह का नाम इसमें सबसे उपर रखा जा सकता है। चंदौली सीट से गठबंधन के प्रबल दावेदार रहे विनीत को टिकट नहीं मिला तो चुनावी परिदृश्य से दूर थे लेकिन भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. महेन्द्रनाथ पाण्डेय उनकी क्षमताओं को जानते थे। प्रदेश अध्यक्ष और सैयदराजा के विधायक सुशील सिंह के अपने घर आने पर विनीत ने जिन सीटों पर जोर लगाया वहां एनडीए की स्थिति पहले भले कमजोर आंकी जा रही थी लेकिन अंतिम समय में बाजी पलट गयी।

चंदौली के कमजोर इलाकों में लगाया जोर

गौरतलब है कि चंदौली सीट पर अजगरा और सकलडीहा में भाजपा के विधायक नहीं थे और विनीत ने इस पर खुद को केन्द्रित किया। सपा और भासपा के कब्जे वाली सीटों पर अपने समर्थकों को सक्रिय करने के संग वोट को भाजपा की तरफ शिफ्ट कराने पर पूरा ध्यान रहा। इसका लाभ यह रहा कि प्रदेश अध्यक्ष खुद चंदौली के दूसरे तीन विधानसभा क्षेत्रों पर पूरा जोर लगाये। रही सही कसर सैयदराजा जहां पिछले विधानसभा चुनाव में विनीत दूसरे नंबर पर थे वहां से पूरी करा दी।

अपना दल के लिए भी बने सहायक

सिर्फ चंदौली ही नहीं बल्कि अपना दल ने भी विनीत को सहयोग के लिए कहा था। विनीत की पत्नी प्रमिला सिंह यहां पर जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। सम्भवत: यही कारण रहा कि बड़ी संख्या में बसपा के वोटों को केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के लिए शिफ्ट कराने में उनकी भी भूमिका रही। कुछ यही स्थिति राबर्ट्सगंज सीट की भी रही। विनीत दोनों ही जनपद के पूर्व एमएलसी रह चुके हैं जिसका लाभ पहले भले गठबंधन नहंीं उठा सका हो लेकिन अपना दल को जरूर मिला।

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