वाराणसी। लगभग 12 साल से अधिक पुराने नगर निगम चुनाव में कथित फर्जी मतदान को लेकर घर पर चढ़ कर फायििरंग के बहुचर्चित मामलों में आरोप साबित नहीं होने पर बुधवार को अपर जिला व सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) गुलाम उर मदार की अदालत ने पूर्व विधायक अजय राय उनके भाई सुरेश राय तथा पूर्व पार्षद दिनेश पाल उर्फ दीनू व उनके भाई सुरेश पाल को दोषमुक्त कर दिया। अजय राय और दीनू पाल की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ चेतगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। खास यह कि उन दिनों अजय राय भाजपा के कद्दावर नेता हुआ करते थे जबकि दीनू पाल इस समय महागबंधन के अहम घटक समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी थे।

बूथ से लेकर घर तक चला था बवाल

अभियोजन पक्ष के अनुसार नगर निगम के चुनाव के लिए 31 अक्टूबर 2006 को वार्ड संख्या 21 हबीबपुरा के मतदान स्थल पिशाचमोचन विद्यालय पर मतदान चल रहा था। मतदान केंद्र पर तत्कालीन भाजपा विधायक अजय राय और उनके भाई द्वारा फर्जी मतदान कराने की सूचना मिलने पर दोपहर में सपा के तत्कालीन नगर पदाधिकारी दीनू पाल पार्टी समर्थकों संग मतदान केंद्र पर पहुंचे और आपत्ति करने लगे। जिसपर दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया। फर्जी मतदान कराने की जब सूचना देने जब दीनू पाल थाने पर जा रहा था कि अजय राय और उनके लोगों ने असलहा लेकर उसे दौड़ा लिया। जान बचाने के लिए भागकर दीनू अपने घर पहुंचा तो वहां भी सभी लोग पीछा करते हुए उसके घर पर चढ़ आये और कई चक्र फायरिंग किये। इन लोगों ने घर मे घुसकर तोड़फोड़,गालीगलौज व घर के बाहर खड़ी कार व मोटरसाइकिल को क्षतिग्रस्त कर दिये। दीनू पाल ने इस घटना को लेकर चेतगंज थाने में अजय राय और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराया। दीनू पाल और उसके समर्थकों द्वारा अजय राय के परिजन के साथ मतदान को लेकर मारपीट करने का आरोप लगाते हुए भरत राय ने दीनू पाल और उसके समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद फैसला सुनाया।

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