‘बकाये’ को लेकर पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति फिर से विवादों में, दशाश्वमेध में दर्ज हुआ रंगदारी का मुकदमा

वाराणसी। सपा के शासनकाल में खनन मंंत्री रहे गायत्री प्रजापति की तूती बोलती थी। मुख्यमंत्री अखिलेश ने उगाही की चौतरफा गूंज के बाद हटाने का निर्णय लिया तो उनके पिता मुलायम सिंह यादव बीच में आ गये। दुष्कर्म के मामले में शिकंजा कसने तक गायत्री प्रजापति सपा के लिए गले की फांस बन चुके थे। इसके बाद कोर्ट से जमानत पाने के प्रयासों से लेकर पीड़िता को धमकाने तक वह चर्चा में बने रहते हैं। ताजा मामला दशाश्वमेध थाने में दर्ज हुआ है जिसमें अरविंद तिवारी तहरीर दी है। आरोप है कि अपने कार्यकाल के दौरान हुए टेंडर का कमीशन मांगते हुए गायत्री प्रजापति ने फोन कर लखनऊ आकर मिलने को कहा था।

पहले पुलिस ने हल्के में लिया था मामला

अरविंद ने जो थाने में तहरीर दी है उसके मुताबिक सोनभद्र के बालू खनन के टेंडर से जुड़े एक पुराने मामले में उनके मोबाइल पर 9 जून को कॉल आई। दूसरी तरफ से खुद को गायत्री प्रसाद प्रजापति बताते हुए फरमान सुनाया कि लखनऊ जेल में आकर मिलो और टेंडर का कमीशन दे जाओ। पैसा न देने पर अंजाम भुगतने की धमकी भी दी गई। अरविंद की शिकायत पर पहले दशाश्वमेध थाने की पुलिस ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने सीएम योगी से लेकर डीजीपी ओपी सिंह को पत्र भेजकर कार्रवाई की गुहार लगाई। मीडिया में मामला आने के साथ पुलिस एक्शन मोड में आ गयी। शनिवार को आननफानन में अरविंद को बुलाकर तहरीर ली और गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ रंगदारी मांगने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया।

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