नृत्य कला की खातिर जीवन के कई दशक तक किया अनवरत काम, बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर को एक और सम्मान

वाराणसी। पिछले कई दशकों तक बीएचयू के नृत्य कला विभाग को सेवाएं दे चुके प्रो. प्रेमचन्द होम्बल को एक और सम्मान मिला है। प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने संस्था रंगभारती एवं उत्तर प्रदेश नागरिक परिषद द्वारा राजभवन में आयोजित सम्मान समारोह में प्रो. होम्बल को स्मृति चिन्ह, अंग वस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इससे पहले भी उन्हें सिंगार मणि, (सुर सिंगार संसद मुम्बई), अवन्तिका नेशनल ह्यूमेनिटी (अवन्तिका ग्रुप, नई दिल्ली), नवरस संगीत वाचस्पति ( नव साधना कला केन्द्र तरना), उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्राप्त सम्मान, नृत्य कला निधि ( जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वरूपानन्द सरस्वती द्वारकापीठ) शिरोमणि ( इन्टरनेशनल एसो. मदर इंडिया क्लब एवं ग्लोबल संगठन), शिक्षण सम्मान ( रोटरी क्लब) आचार्य श्रेष्ठ सम्मान( हिन्दुस्तान आर्ट एण्ड म्यूजिक सोसायटी भिलाई), नृत्य शिरोमणि( नृत्यांजलि कला अकादमी जबलपुर) इत्यादि मिल चुके हैं।

बचपन से ही रही कला में रुचि

गौरतलब है कि प्रो. प्रेमचन्द होम्बल का जन्म 24 मार्च 1952, नृत्य को समर्पित परिवार में हुआ। माता श्रीमती गिरिजा देवी होम्बल एवं पिता स्व. शंकर होम्बल के सानिध्य में बाल्यावस्था से ही आपकी नृत्य शिक्षा प्रारम्भ हुई। भारत सरकार द्वारा प्रदत्त छात्रवृत्ति के अंतर्गत आपने भरतनाट्यम का गहन प्रशिक्षण पद्मभूषण गुरु स्व. श्रीमती रुक्मिणी देवी अरुण्डेल द्वारा संचालित कला-क्षेत्र चेन्नई से प्राप्त किया। आपने भरतनाट्यम नृत्य में स्नातकोत्तर की उपाधि इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ से प्रथम श्रेणी में प्राप्त की। सन 1981 में बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में शिक्षण आरम्भ किया। निरन्तर 36 वर्ष सेवा कर 2017 में एसोसिएट प्रोफेसर पद से सेवा निवृत्त हुए। आपने अपने सेवाकाल में 2010 से 2016 तक नृत्य विभागाध्यक्ष के पद पर भी कार्य किया। प्रो. होम्बल ने देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर नृत्य की सफल प्रस्तुतियां दीं हैं। इनमें श्रीलंका,थाईलैण्ड, फिनलैण्ड, अमेरिका, सोवियत संघ, नेपाल, दिल्ली,मुम्बई, कलकत्ता,विशाखापट्टनम्, चेन्नई, बैंगलोर, भोपाल, इन्दौर, उज्जैन, ग्वालियर, लखनऊ, इलाहाबाद, जयपुर इत्यादि शामिल हैं।

वाराणसी। पिछले कई दशकों तक बीएचयू के नृत्य कला विभाग को सेवाएं दे चुके प्रो. प्रेमचन्द होम्बल को एक और सम्मान मिला है। प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने संस्था रंगभारती एवं उत्तर प्रदेश नागरिक परिषद द्वारा राजभवन में आयोजित सम्मान समारोह में प्रो. होम्बल को स्मृति चिन्ह, अंग वस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इससे पहले भी उन्हें सिंगार मणि, (सुर सिंगार संसद मुम्बई), अवन्तिका नेशनल ह्यूमेनिटी (अवन्तिका ग्रुप, नई दिल्ली), नवरस संगीत वाचस्पति ( नव साधना कला केन्द्र तरना), उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्राप्त सम्मान, नृत्य कला निधि ( जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वरूपानन्द सरस्वती द्वारकापीठ) शिरोमणि ( इन्टरनेशनल एसो. मदर इंडिया क्लब एवं ग्लोबल संगठन), शिक्षण सम्मान ( रोटरी क्लब) आचार्य श्रेष्ठ सम्मान( हिन्दुस्तान आर्ट एण्ड म्यूजिक सोसायटी भिलाई), नृत्य शिरोमणि( नृत्यांजलि कला अकादमी जबलपुर) इत्यादि मिल चुके हैं।

बचपन से ही रही कला में रुचि

गौरतलब है कि प्रो. प्रेमचन्द होम्बल का जन्म 24 मार्च 1952, नृत्य को समर्पित परिवार में हुआ। माता श्रीमती गिरिजा देवी होम्बल एवं पिता स्व. शंकर होम्बल के सानिध्य में बाल्यावस्था से ही आपकी नृत्य शिक्षा प्रारम्भ हुई। भारत सरकार द्वारा प्रदत्त छात्रवृत्ति के अंतर्गत आपने भरतनाट्यम का गहन प्रशिक्षण पद्मभूषण गुरु स्व. श्रीमती रुक्मिणी देवी अरुण्डेल द्वारा संचालित कला-क्षेत्र चेन्नई से प्राप्त किया। आपने भरतनाट्यम नृत्य में स्नातकोत्तर की उपाधि इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ से प्रथम श्रेणी में प्राप्त की। सन 1981 में बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में शिक्षण आरम्भ किया। निरन्तर 36 वर्ष सेवा कर 2017 में एसोसिएट प्रोफेसर पद से सेवा निवृत्त हुए। आपने अपने सेवाकाल में 2010 से 2016 तक नृत्य विभागाध्यक्ष के पद पर भी कार्य किया। प्रो. होम्बल ने देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर नृत्य की सफल प्रस्तुतियां दीं हैं। इनमें श्रीलंका,थाईलैण्ड, फिनलैण्ड, अमेरिका, सोवियत संघ, नेपाल, दिल्ली,मुम्बई, कलकत्ता,विशाखापट्टनम्, चेन्नई, बैंगलोर, भोपाल, इन्दौर, उज्जैन, ग्वालियर, लखनऊ, इलाहाबाद, जयपुर इत्यादि शामिल हैं।

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